डायबिटीज एक ऐसी गंभीर मेडिकल समस्या है जिसको साइलेंट किलर भी कहते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डायबिटीज होने के कारण पेशेंट की सारी हेल्थ पर असर होता है। वहीं डब्ल्यूएचओ की मानें तो एक अनुमान के अनुसार, भारत में 18 साल से ज्यादा उम्र के 77 मिलियन लोग टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं। इसके अलावा 25 मिलियन लोग प्रीडायबिटीज भी हैं हैरानी की बात तो यहां ये है कि इनमें से करीब 50 फीसदी लोग इस बीमारी के प्रति जागरुक नहीं हैं। इस बात का ध्यान रखें कि यदि डायबिटीज का समय पर इलाज न हो और इसकी दवाईयां न ली जाए तो यह खतरनाक बीमारी भी बन सकती है। खासकर पुरुषों के स्वास्थ्य पर इसका नेगेटिव असर होगा। ऐसा माना जाता है कि डायबिटीज के चलते पुरुषों के स्पर्म काउंट में भी गिरावट आ सकती है लेकिन क्या सच में ऐसा होता है। इस बारे में एक्सपर्ट्स का क्या कहना है आज इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं।
क्या डायबिटीज के कारण कम हो जाएंगे स्पर्म काउंट?
जैसे हमने आपको बताया कि डायबिटीज के कारण पूरी हेल्थ पर बुरा असर होगा। फर्टिलिटी भी इसी का एक हिस्सा ही है पुरुषों के स्वास्थ्य के बारे में यदि बात की जाए तो डायबिटीज के कारण स्पर्म काउंट में गिरावट आएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायबिटीज कई मायनों में स्पर्म काउंट को प्रभावित करेगी जैसे इसके कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ेगा क्योंकि ग्लूकोज हाई होने के कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस प्रभावित होगा इससे स्पर्म सेल्स पर नेगेटिव असर होगा। इससे स्पर्म मोटिलिटी और वायबिलिटी भी प्रभावित होगी। डायबिटीज के चलते हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं जिसके कारण पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर भी कम हो जाएगा। यह मेल हार्मोन पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी और कांउट सुधारने के लिए बेहद जरुरी माना जाता है। इसके अलावा डॉक्टर्स की मानें तो डायबिटीज होने के कारण टेस्टिकुलर डिस्फंक्शन होगा। इसका अर्थ है कि स्पर्म जिस तरह के एन्वायरमेंट में रहते हैं और विकसित होते हैं वो खराब हो जाता है ऐसे में स्पर्म से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में यह कह सकते हैं कि स्पर्म क्वालिटी और काउंट कम करने में डायबिटीज अहम भूमिका निभाती है इसलिए इसे अनदेखा न करें।

ऐसे प्रभावित होते हैं स्पर्म
स्पर्म काउंट
डायबिटीज के कारण जैसे स्पर्म क्वालिटी पर असर होता है वैसे ही स्पर्म काउंट पर भी इसका बुरा असर होगा। इसके कारण स्पर्म काउंट कम हो जाएंगे जो कि प्रोडक्शन के लिए ठीक नहीं है।
स्पर्म क्वालिटी
डायबिटीज के कारण जैसे ब्लड शुगर लेवल बढ़ेगा तो स्पर्म क्वालिटी पर नेगेटिव असर होगा। इसके कारण स्पर्म मोटिलिटी, डीएनए इंटीग्रिटी और सिमिनल प्लाजमा पर असर होगा। जब ब्लड शुगर का स्तर बढ़ता है, तो ऐसे में स्पर्म क्वालिटी पर निगेटिव असर दिखने लगता है। सिमिनल प्लाजमा वीर्य का ऐसा फ्लयूड कंपोनेंट होता है जो कि पुरुषों के हार्मोन्स को रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट से लेकर जाएगा और उन्हें नॉरिश करेगा व साथ ही उन्हें सुरक्षित भी रखेगा।
सीमन वॉल्यूम
इसके कारण टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट आएग जिसेस सीमन वॉल्यूम भी प्रभावित होगा। डायबिटीज के कारण टेस्टिकुलर में ब्लड फ्लो बाधित होता है, जिससे टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होगा, जो कि सीमन वॉल्यूम कम करने में खास माना जाता है।

इस तरह बढ़ाएं डायबिटीज होने पर स्पर्म काउंट
स्पर्म काउंट कम या ज्यादा हैं इसके बारे में यदि आप विस्तार से जानना चाहते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। लाइफस्टाइल में सुधार करके आप इनको बढ़ा सकते हैं।
. नियमित तौर पर एक्सरसाइज करें। इससे बॉडी का ब्लड फ्लो बेहतर होगा इससे हार्मोनल अंसतुलन में सुधार होगा ऐसे में इससे स्पर्म क्वालिटी और काउंट के बढ़ने की संभावना बढ़ेगी।
.अपनी डाइट में हेल्दी चीजें जैसे कि सब्जियां, फल लें इससे स्पर्म बूस्ट होगा इससे स्पर्म काउंट बेहतर होगा।

. धूम्रपान, शराब और ड्रग्स से दूर रहें। ऐसी आदतें स्पर्म क्वालिटी और काउंट कम कर देगी।
. अपना सोने का पैटर्न सुधारें। रोज 8 घंटे की नींद जरुर लें। इससे आपकी ऑवरऑल हेल्थ अच्छी रहेगी और स्पर्म क्वालिटी भी अच्छी होगी।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
