देश में लगातार गाड़ियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत करती हैं कि इसके साइड इफेक्ट्स भी जल्द ही हमें देखने को मिलेंगे। वहीं बीते कुछ सालों में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। बढ़ता प्रदूषण एयर क्वालिटी को खराब करता है, जिससे लोगों को फेफड़ों से संबंधित रोग होने का खतरा ज्यादा रहता है लेकिन इस खराब एयर क्वालिटी का सबसे ज्यादा नुकसान पहले से लंग्स कैंसर से ग्रसित लोगों को उठाना पड़ेगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्रदूषण रेस्पिरेटरी सिस्टम पर खराब असर डालता है जो सांस से जुड़ी समस्याओं की वजह बनेगा। इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं कि खराब एयर क्वालिटी का असर लंग कैंसर के मरीजों पर क्या पड़ता है।
कैंसर के इलाज का असर कम होना
एयर पॉल्यूशन में मौजूद हानिकारक कण और कैमिकल्स जैसे कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ओजोन, लंग कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी करेंगे। ये हानिकारक तत्व कैंसर इलाज की प्रभावशीलता को कम करेंगे, जिससे मरीज के इलाज का रिजल्ट प्रभावित होगा।

कैंसर का जोखिम ज्यादा
वायु प्रदूषण में मौजूद कैंसरजन तत्व कैंसर के बढ़ने की वजह बनेंगे। खराब एयर क्वालिटी में रहने से कैंसर सेल्स की ग्रोथ में बढ़ोतरी होगी और यह मरीज के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
श्वसन प्रणाली पर दबाव
फेफड़ों के कैंसर के मरीजों की श्वसन प्रणाली पहले से कमजोर होती है। ऐसे में खराब एयर क्वालिटी के कारण उन्हें सांस लेने में ज्यादा कठिनाई होगी। प्रदूषक छोटे कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचेंगे और सूजन और जलन पैदा करेंगे जिससे श्वसन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और मरीज को सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
थकान और कमजोरी
लंग्स कैंसर के मरीजों को अक्सर थकान और कमजोरी की समस्या होती है। वहीं खराब एयर क्वालिटी और प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाएगी जिससे मरीजों को ज्यादा थकान का अनुभव होगा। इससे उनकी एनर्जी का स्तर और भी कम होगा, ऐसे में शरीर इलाज के लिए तैयार नहीं होता है।

इस बात का रखें खास ध्यान
लंग्स कैंसर के मरीजों के लिए एयर पॉल्यूशन और खराब एयर क्वालिटी हानिकारक साबित होगी। इसे ध्यान में रखते हुए लंग कैंसर के मरीजों को प्रदूषण में ज्यादा बाहर नहीं निकलना चाहिए। साथ ही, मास्क का प्रयोग करें इसके अलावा, समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं।
