रिश्ता अगर अच्छा न चल रहा हो तो बहुत से लोग आपको सलाह देंगे। आपके दोस्त, रिश्तेदार आदि। ऐसे में हम अपने रिश्ते को ठीक करने के लिए सलाह लेने की सोच ही लेते हैं और आशा करते हैं कि शायद कुछ ठीक हो ही जाए। सौ में से कुछ प्रतिशत कभी-कभी दूसरों की सलाह काम कर जाती है, लेकिन हर बार आंखें मूंदकर विश्वास करना ठीक नहीं। कई बार जब हम विश्वास कर राय मान लेते हैं तो जितना रिश्ता चल रहा होता है उतना भी खराब हो जाता है, इसलिए यहां आपको बताया जाएगा कि किन सलाहों से आपको बचने की जरूरत है।
रिश्ता बचाने की मुफ्त की सलाहें
सलाह नंबर एक
चुप रहना सीख लें, इस सलाह पर हमेशा विश्वास न करें। अक्सर जब भी बहसबाजी होती है चुप रहने के लिए कहा जाता है। वे कहते हैं कि बहस करने से रिश्ता टूट सकता है या बात बिगड़ सकती है। लेकिन सही होते हुए भी अगर आप चुप रह गए तो जल्दी ही आपका पार्टनर रिश्ते को डॉमिनेट करने लगेगा। हमेशा अपनी चलाएगा क्योंकि आप तो कुछ बोलते ही नहीं। इसलिए अपनी बात रखना सीखें।
सलाह नंबर दो
साथ रहते हैं दो लोग तो एक जैसे हो जाते हैं। ये कहावत अच्छी लगती है सुनने में, लेकिन तब, जब समय के साथ लोग बदलने लगे। अगर आप शादी के बाद ही अपने पार्टनर को बदलने की कोशिश करेंगे या उसके हिसाब से बदलेंगे खुद को तो ग़लत है। चाहते हैं कि उम्रभर एक दूसरे का साथ रहे तो एक-दूसरे को उसके मूल रूप में स्वीकार करना सीखें। एक जैसा बनाने के बजाय, एक-दूजे का पूरक बनने पर फ़ोकस करें।
सलाह नंबर तीन
शादी के बाद कमान हाथ में ले लेनी चाहिए। ये तो आपने बहुत से लोगों से सुना होगा। वैवाहिक जीवन एक चार पहिया गाड़ी है, जिसमें दो पहिए पति और दो पत्नी रूपी होते हैं। इसका मतलब ये है कि रिश्ते में बैलेंस बराबर का होना चाहिए। जब संतुलन की जरूरत है तो एक व्यक्ति के हाथ में कमान का कोई मतलब नहीं होता। इससे रिश्ते में ग़लतफ़हमी बढ़ेगी। रिश्ते में शक्ति हासिल करना चाहेंगे तो रिश्ता खो बैठेंगे। इसलिए शक्ति हासिल करने के बारे में न सोचें, प्यार और विश्वास से रिश्ता बढ़ाएं।
सलाह नंबर चार
किसी की पर्सनैलिटी जाननी है तो उसका फोन एक अच्छा माध्यम है। ऐसे में अगर आप सोचते हैं कि आपके पार्टनर का फ़ोन चेक करके उसके बारे में जान सकते हैं तो आप गलत हैं। आपको सलाह यही दी जाती है कि पार्टनर की जासूसी करने से बचें। यदि आपको लगता है कि उसकी जिंदगी में कोई और है तो सीधा पूछ लें। इस तरह चोरी-छुपे फ़ोन देखने से ग़लफ़हमियां बढ़ती हैं।
