भारत में दुनिया का सबसे ज्यादा छात्र पढ़ता है। ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन के आंकड़ों की बात करें तो पिछले कुछ सालों में ये तादाद कम से कम 28% तक बढ़ी है। जहां संख्या बढ़ रही है वहीं इसके साथ एक परेशानी भी सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार पिछले कुछ सालों मे आधे से ज्यादा स्टूडेंट्स ने मॉडरेट से लेकर सीवियर डिप्रेशन के लक्षणों को महसूस किया है और इसकी वजह सिर्फ एक नहीं है, बहुत सी हैं।
Career की टेंशन
हम यहां कई स्टूडेंट्स की बात नहीं कर सकते बल्कि हर एक को अपने करियर को लेकर चिंता होती है। उन्हें और उनके परिवार वालों को उनसे उम्मीदें होती हैं। एंट्री लेवल की नौकरियों के लिए साल दर साल बढ़ते कॉम्पिटीशन के साथ, इसके आसपास की अनिश्चितता उन्हें जरूरत से ज्यादा प्रेशर लेने के लिए फोर्स कर सकती है, जो परेशानियों में बदल सकता है।
हालातों से हार जाना
कई छात्र जो कॉलेज में आते हैं वे अपनी फैमली से दूर हो जाते हैं, उनके पास उस वक्त कोई नहीं होता। इसका मतलब है कि स्ट्रेसफुल सिचुएशन का सामना करते वक्त उनके पास परिवार और दोस्तों की सपोर्ट नहीं होती। जिसकी वजह से वे शराब पीने, ड्रग्स लेने और सोशल मीडिया जैसी चीजों के आदी हो जाते हैं। क्योंकि उन्हें हालातों का सामना करना ही नहीं आता। हमें बहुत जल्दी होती है कि घर से दूर जाए, लेकिन जब जाते हैं तब समझ नहीं आता।
मेंटल हेल्थ परेशानियां, एक कलंक?
भारत में अक्सर मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियों को अच्छा नहीं समझा जाता। बहुत से छात्र अपने सामने आने वाली समस्याएं जैसे कि पढ़ाई, निजी परेशानी या किसी और दिक्कतों के बारे में बोलने में डर लगता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें जज किया जाएगा और कहा जाएगा कि छोटी सी तो दिक्कत है।
इस तरह कर सकते हैं स्टूडेंट्स की मदद
Peer Support Programs
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर मेंटल हेल्थ से जुड़ा कलंक दूर करना चाहते हैं तो सबसे पहला कदम सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता पैदा करना होना चाहिए और ये टीचर और स्टूडेंट्स को शामिल करने वाला पीयर सपोर्ट प्रोग्राम के जरिए किया जा सकता है। इस वजह से छात्र अपनी परेशानियों सही तरीके से बता पाएंगे।
Professional Help
जो कॉलेज प्लेसमेंट देते हैं, उन्हें बच्चों की मदद के लिए करियर काउंस्लिंग या प्रोफेशन हेल्प जरूर रखनी चाहिए। इस वजह से स्टू़डेंट्स को अपनी परेशानियों को बयां करने के लिए सेफ स्पेस मिल सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
