राजस्थान में नवजात बच्चों को जन्म के समय दी जाने वाली हैपेटाइटिस बी वैक्सीन की उपलब्धता में भारी कमी आ गई है। यह स्थिति राज्य के विभिन्न जिलों, विशेष रूप से जयपुर में देखी जा रही है। प्राइवेट अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों में इस टीके की कमी ने बच्चों के टीकाकरण को प्रभावित किया है, जबकि सरकारी अस्पतालों में अभी भी इसकी पर्याप्त आपूर्ति बनी हुई है।
हैपेटाइटिस बी वैक्सीन का प्रशासन नवजात बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बीमारी से सुरक्षा प्रदान करती है। सरकारी अस्पतालों में इस वैक्सीनेशन की उपलब्धता बनी हुई है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वैक्सीन की कमी के कारण कई माता-पिता चिंतित हैं। वे अपने बच्चों के लिए वैक्सीन की तलाश में एक मेडिकल स्टोर से दूसरे मेडिकल स्टोर का दौरा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
वैक्सीनेशन में देरी की आशंका
हैपेटाइटिस बी वैक्सीन की कमी के चलते प्राइवेट अस्पतालों में पैदा होने वाले नवजात बच्चों का वैक्सीनेशन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो इससे कई बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। चिकित्सा क्षेत्र में काम करने वाले कुछ चिकित्सकों का कहना है कि वैक्सीन की कमी से गेस्ट्रो मरीजों को भी दिक्कतें हो रही हैं, क्योंकि कई बार उन्हें भी इस टीके की आवश्यकता होती है।
ड्रग कंट्रोलर की कार्रवाई
इस समस्या के बारे में जानकारी मिलने के बाद, राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने वैक्सीन निर्माताओं को आवश्यक निर्देश दिए हैं कि वे वैक्सीन की उपलब्धता को सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि “हमारी जानकारी में आया है कि कुछ क्षेत्रों में वैक्सीन की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। हम इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं।”
ड्रग कंट्रोलर ने यह भी आश्वासन दिया कि वैक्सीनेशन की कमी को दूर करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जल्द ही स्थिति में सुधार की उम्मीद है, जिससे माता-पिता को अपने बच्चों के वैक्सीनेशन में कोई बाधा नहीं आएगी।
सरकारी अस्पतालों में राहत
एक सकारात्मक पहलू यह है कि सरकारी अस्पतालों में हैपेटाइटिस बी वैक्सीन की शॉर्टेज नहीं है। ऐसे में जरूरतमंद परिवार सरकारी अस्पतालों से टीकाकरण करा सकते हैं। यह सुविधा उन माता-पिता के लिए राहत की बात है जो प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन की कमी के कारण चिंतित थे।
