बॉलीवुड एक्ट्रेस समीरा रेड्डी अपने बेबाक अंदाज और बोल्डनेस के लिए जानी जाती हैं। बात चाहे लुक्स की हो या फिर खुद का नजरिया शेयर करने की या अपनी बात रखने की, वह हर चीज को बेबाकी से ही बोलना पसंद करती हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी आया था, जब समीरा रेड्डी को अपनी लाइफ में काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ा था। पिछले दिनों देबिना बनर्जी के साथ पॉडकास्ट के दौरान एक्ट्रेस समीरा रेड्डी ने बताया कि उन्हें कंसीव करने से लेकर प्रेग्नेंसी के दौरान भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

बच्चे के जन्म के बाद बढ़ गया था वजन

समीरा ने बताया कि 2015 में जब उन्होंने बेटे हंस को जन्म दिया था, तब उनका वजन 35 किलो तक बढ़ गया था। वजन बढ़ने के बाद उनका वजन 105 किलोग्राम हो गया था। एक्ट्रेस ने कहा कि – ‘पोस्टपार्टम के बाद बढ़े हुए वजन को देखने के बाद लोग मेरा मजाक भी उड़ाते थे, लोग मेरा शरीर न देख पाए और मजाक न उड़ाए, इसकी वजह से मैं एक साल तक अपने घर से बाहर नहीं निकली थी’। इतना ही नहीं पोस्टपार्टम के बाद बढ़े हुए वजन के कारण एक्ट्रेस समीरा रेड्डी की मानसिक स्थिति भी खराब हो गई थी।

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प्रोलैक्टिनोमा के कारण आई परेशानी

पोस्टपार्टम ही नहीं बल्कि अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी और कंसीव के दौरान होने वाली परेशानियों के बारे में भी समीरा रेड्डी ने खुलकर पॉडकास्ट में बात की है। उन्होंने बताया कि वह काफी लंबे समय तक प्रोलैक्टिनोमा नाम की बीमारी से जूझ रही थीं, जिसके कारण उन्हें कंसीव करने में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

प्रेग्नेंसी के दौरान होती थी ब्लीडिंग

समीरा रेड्डी ने बताया कि उन्हें प्रोलेक्‍टीनोमा के कारण सिर्फ प्रेग्नेंसी कंसीव करने में परेशानी हुई थी, बल्कि प्रेग्नेंसी के दौरान भी उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने ने बताया कि पहली प्रेग्नेंसी के समय उन्हें बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती थीं। प्रेग्‍नेंसी में ब्लीडिंग होना खतरे का संकेत माना जाता है, इसलिए उन्हें काफी डर लगता था। ब्लीडिंग के कारण समीरा रेड्डी पूरा दिन बिस्तर पर ही लेटी रहती थीं, इस दौरान उन्हें चलने-फिरने और किसी भी तरह का काम करने में बहुत परेशानी होती थी।

प्रोलैक्टिनोमा क्या है?

मायो क्लीनिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रोलैक्टिनोमा हार्मोन-उत्पादक ट्यूमर का सबसे आम प्रकार है। यह इंसान के दिमाग के आधार पर पिट्यूटरी ग्रंथि में विकसित होता है। यह एक घातक समस्या नहीं हैं लेकिन इसके कारण आंखों से देखने में परेशानी, बांझपन और अन्य शारीरिक समस्याएं होती हैं।

लक्षण

इसके लक्षण कुछ इस प्रकार हैं।

. अनियमित मासिक धर्म या मासिक धर्म न होना

. गर्भवती या स्तनपान न कराने पर स्तनों से दूधिया स्राव

. मुंहासे और शरीर और चेहरे पर अत्यधिक बाल उगना

. बांझपन से जुड़ी परेशानियां

. कमजोर और भंगुर हड्डियां जो आसानी से टूट जाती हैं (ऑस्टियोपोरोसिस)

. यौन संबंध बनाने में परेशानी

. बालों का झड़ना और गंजापन।

इस स्थिति में महिलाओं को आराम और कई तरह के ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इससे जूझ रहे व्यक्ति को जितना ज्यादा ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, उससे कहीं ज्यादा परिवार और दोस्तों के सपोर्ट की जरूरत पड़ती है।

By tnm

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