लोगों को ट्रोमा के बारे में जागरुक करने के लिए हर साल 17 अक्तूबर को वर्ल्ड ट्रोमा डे मनाया जाता है। यह दिन ट्रोमा उसके कारणों को समझने के महत्व के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए मनाया जाता है। तो चलिए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि ट्रोमा क्या है, उसके कारण और बचाव के बारे में बताते हैं।
ऐसे हुई थी वर्ल्ड ट्रोमा मनाने की शुरुआत
इस दिन को मनाने की शुरुआत लोगों को ट्रोमा के बारे में बताने और उन्हें इसके बारे में जागरुक करने के लिए की गई थी। इस दिन कई बड़ी-बड़ी संस्थाएं और मेंटल हेल्थ के डॉक्टर्स शारीरिक लोगों के इसके बारे में बताते हैं और उन्हें ट्रोमा के प्रति जागरुक करते हैं। यह दिन लोगों को ट्रोमा के बारे में चर्चा करने पर मजबूर करता है इससे जूझ रहे लोगों को इस दिन मानसिक स्वास्थ्य संगठनों के द्वारा समझाया जाता है और उन्हें इससे निपटने के तरीकों के बारे में बताया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य एजेंसियों सहित अलग संगठनों ने जागरुकता को बढ़ावा देने और देखभाल के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्या है ट्रोमा?
ट्रोमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति परेशान रहता है, वह इमोश्नल तौर पर भी शामिल हो सकते हैं लेकिन इन्हें सीमित नहीं रखना चाहिए।
इसके लिए कुछ कारक जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे प्राकृतिक आपदाएं भूकंप, बाढ़, तूफान और अन्य विनाशकारी घटनाएं जो जीवन को परेशान करती हैं इसके कारण भी व्यक्ति ट्रोमा में जा सकता है।
हिंसा
शारीरिक, भावनात्मक या फिर यौन शोषण, घरेलू हिंसा या सामुदायिक हिंसा भी इसका कारण हो सकती हैं।
दुर्घटनाएं
कार दुर्घटना, कार्यस्थल की दुर्घटना या अन्य अनजान चोटें भी ट्रोमा दे सकती हैं। कोई खास व्यक्ति की मृत्यु या जीवन में कुछ बदलाव जैसे तलाक या किसी रिश्ते में ठोकर खाने के कारण भी व्यक्ति ट्रोमा में जा सकता है।
ट्रोमा के प्रकार
एक्यूट ट्रोमा
किसी दर्दनाक घटना या फिर प्राकृतिक आपदा के कारण यह हो सकता है।
क्रोनिक ट्रोमा
घरेलू हिंसा या फिर किसी को लगातार धमकाने जैसी दर्दनाक घटनाओं के बार-बार और लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण यह ट्रोमा हो सकता है।
कॉम्पलेक्स ट्रोमा
कई दर्दनाक घटनाओं के संपर्क में आना जो अक्सर कॉम्पलेक्स ट्रोमा इनवेजिव प्रकृति की होती है जो व्यक्ति की भावनाओं को नियंत्रित करने और स्वस्थ संबंधों को बनाए रखने की क्षमता को प्रभावित करती है।
ट्रोमा के लक्षण
ट्रोमा के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य पर कई प्रभाव हो सकते हैं। इसके लक्षण कुछ इस प्रकार से हैं।

मनोवैज्ञानिक लक्षण
चिंता, डिप्रेशन, पीटीएसडी, फ्लैशबैक और इमोशनल नंबनेस।
व्यवहार में बदलाव
सामाजिक मेलजोल से दूरी बनाए, माद्रक द्रव्यों का बढ़ता इस्तेमाल खाने या सोने के पैटर्न में बदलाव।
शारीरिक स्वास्थ्य
पुराना दर्द, थकान और अन्य तनाव संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं।

ऐसे करें देखभाल
टीआईसी यह एक ऐसा दृष्टिकोण है जो कि ट्रोमा के कारण को पहचानता है और उपचार के लिए एक सेफ वातावरण बनाने का प्रयास करता है।
