क्रोनिक हार्ट फेलियर एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल कमजोर हो जाता है और खून को ठीक से पंप नहीं कर पाता। कई बार क्रोनिक हार्ट फेलियर इतना खराब हो जाता है जिसे वर्सनिंग हार्ट फेलियर कहते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है जिससे आप बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने से बचते हैं और जिंदगी को बदतर होने से भी बचा सकते हैं। आज यानी की 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस (World Heart Day 2024) मनाया जा रहा है। ऐसे में आपको बताते हैं कि हार्ट फेलियर क्या है और आप इससे कैसे बच सकते हैं।

क्या होता है क्रॉनिक हार्ट फेलियर?

दिल की बीमारी के कारण जब हमारा दिल पूरी ताकत से खून पंप नहीं कर पाता तो इसे क्रॉनिक हार्ट फेलियर कहते हैं। ये बीमारी अक्सर हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी अन्य बीमारियों के कारण होती है। कई बार दवाईयों के बावजूद भी ये बीमारी बढ़ सकती है, जिसे वर्सनिंग हार्ट फेलियर कहते हैं। इस स्थिति में पेशेंट को बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। ध्यान रहे दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर डॉक्टर की सलाह लेने से इस बीमारी को आप कंट्रोल कर सकते हैं और अस्पताल में भर्ती होने से बच सकते हैं। जब लोग कहते हैं कि उनका दिल काम करना बंद कर रहा है तो इसका मतलब आमतौर पर क्रोनिक हार्ट फेलियर होता है। ‘क्रोनिक’ का मतलब है कि यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है, अचानक नहीं। कई लोगों को यह जानकर हैरानी होती है कि उन्हें यह बीमारी है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं।

हल्के में न लें थकान और सांस फूलने की तकलीफ

थकान और चलने पर सांस फूलने की समस्या का संबंध भी हार्ट फेलियर से हो सकता है। जांच में यह चीज पाई गई है कि यह हार्ट फेलियर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

कारण

एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिल पूरे शरीर में खून पंप करता है जब यह काम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है, तो क्रोनिक हार्ट फेलियर हो सकता है। लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, दिल का दौरा या दिल के वाल्व में समस्या होने से दिल को ज्यादा काम करना पड़ता है, जिससे यह बीमारी हो सकती है। इसके अलावा डायबिटीज और किडनी की बीमारी भी दिल को कमजोर बना सकती हैं।

लक्षण

क्रोनिक हार्ट फेलियर धीरे-धीरे होता है और शुरुआत में इसके लक्षण हल्के ही होते हैं, जैसे थकान इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जब बीमारी बढ़ जाती है तो फेफड़े या शरीर के अन्य हिस्सों में पानी भर जाता है। इससे टखने सूज जाते हैं, सांस फूलती है और खांसी होती है। सबसे बड़ी गलती ये है कि लक्षण गंभीर हो जाने के बाद लोग डॉक्टर के पास जाते हैं।

इलाज के बाद भी बिगड़ सकती है बीमारी

इलाज के बाद क्रोनिक हार्ट फेलियर की स्थिति को संभाला जा सकता है हालांकि यह जानना जरूरी है कि स्टैंडर्ड थेरेपी के बाद भी 6 में से 1 मरीज में क्रोनिक हार्ट फेलियर वर्सनिंग हार्ट फेलियर में बदल सकता है। वर्सनिंग हार्ट फेलियर की स्थिति में मरीजों को बार-बार इंट्रावीनस ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है या अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। समय के साथ अस्पताल में भर्ती होने की दर बढ़ती जाती है और जीवन की गुणवत्ता खराब होती जाती है। पहले वर्सनिंग हार्ट फेलियर के मरीजों को भी वही इलाज मिलता था जो क्रोनिक हार्ट फेलियर के मरीजों के लिए था हालांकि आज के समय में हमने एडवांस्ड थेरेपी विकसित की हैं जिनसे अस्पताल में भर्ती होने का दर कम हो जाता है।

क्या होते हैं वर्सनिंग हार्ट फेलियर के संकेत?

क्रोनिक हार्ट फेलियर के मरीजों को रात में सांस लेने में तकलीफ, अचानक वजन बढ़ना, भूख न लगना, बेहोशी और ज्यादा खांसी जैसे लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए ये लक्षण बीमारी के बढ़ने का संकेत हो सकते हैं। नियमित रूप से कार्डियोलॉजिस्ट से मिलना बहुत जरूरी है ताकि बीमारी बिगड़ने से पहले ही इसका इलाज किया जा सके।

वर्सनिंग हार्ट फेलियर होता है खतरनाक

क्रोनिक हार्ट फेलियर का वर्सनिंग हार्ट फेलियर बन जाना बहुत खतरनाक और दर्दनाक होता है खासकर जो व्यक्ति इलाज ले रहा हो और डाइट एवं लाइफस्टाइल को लेकर सतर्क रहता हो, उसके लिए यह और भी कष्टकारी हो जाता है। जल्दी जांच और एडवांस्ड थेरेपी की मदद से आप अस्पताल में बार-बार जाने से बच सकते हैं और अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं।

By tnm

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