डॉ. निशित सावल अपेक्स अस्पताल में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में आते उन्हें करीबन ढाई साल हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस अस्पताल में आते उन्हें करीबन ढाई साल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी ज्यादा दिलचस्पी Neurodegenerated डिजीज में हैं। खासतौर पर पार्किसन्, मूवमेंट डिसऑर्डर या याददाश्त की दिक्कतें। यह ऐसी समस्या हैं जिनका साइंस की भी ज्यादा जानकारी नहीं है। डॉ. निशित सावल अपेक्स अस्पताल में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में आते उन्हें करीबन ढाई साल हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस अस्पताल में आते उन्हें करीबन ढाई साल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी ज्यादा दिलचस्पी Neurodegenerated डिजीज में हैं। खासतौर पर पार्किसन्, मूवमेंट डिसऑर्डर या याददाश्त की दिक्कतें। यह ऐसी समस्या हैं जिनका साइंस की भी ज्यादा जानकारी नहीं है। इन चीजों का इलाज भी अभी अच्छे से नहीं होता क्योंकि अभी लोगों और डॉक्टरों को भी इनके बारे में जानकारी नहीं है।
पार्किसन्स बीमारी में होती है कई वैराइटी
उन्होंने कहा कि पार्किसन्स में ही कई वैराइटीज होती है। एक बीमारी होती है जो कि पार्किसन्स की तरह ही लगती है लेकिन सिर्फ अग्रवाल कम्यूनिटी के लोगों होती है। जिसको SCA 12 (Spinocerebellar Ataxia) कहते हैं। उनका कहना है कि सबसे पहले पता होना चाहिए कि बीमारी है क्या और इसके लिए मरीज की स्लीप हिस्ट्री देखने पड़ती है ताकि उन्हें बीमारी से बचा जा पाए।
कैसे पता लगेगा बीमारी है?
उन्होंने कहा कि यदि किसी पेशेंट का व्यवहार बहुत जिद्दी हो जाता है। बढ़ती उम्र में यदि ऐसी दिक्कतें हो तो समस्या बढ़ सकती है इसके अलावा अगर किसी का हाथ कांपता है या हाथ से चीज छूट जाती है तो वो भी बीमारी का संकेत ही है। यदि किसी का व्यवहार बदलता है जिद्दी होता है या बूढ़ापे में भी चीजों को लेने की जिद्द करते हैं तो यह भी इसी बीमारी का संकेत है।
