दुनिया के साथ-साथ भारत के कई बड़े और छोटे शहरों में एयर पॉल्यूशन आफत बना हुआ है। ऐसे में हर दिन खराब हवा में सांस लेना शायद आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने से कहीं ज्यादा बुरा हाल कर सकता है और ये आपके मूड पर भी बुरा असर डालेगा। आपको बता दें कि Environmental Science and Ecotechnology में छपी एक नई स्टडी से पता चला है कि लंबे वक्त तक एयर पॉल्यूशन के कॉन्टेक्ट में रहने का; डिप्रेशन के हाई रिस्क के बीच एक मजबूत रिश्ता है।
रिसर्च
आपको बता दें कि Harbin Medical University और Cranfield University द्वारा रिसर्च की गई, जिसमें चीन में 45 साल से ज्यादा उम्र के एडल्ट्स पर 7 सालों तक नजर रखी गई और इस बात पर ध्यान किया गया कि 6 कॉमन एयर पॉल्यूटेंट्स मेंटल हेल्थ पर कैसे असर डालते हैं।
Air Pollution और Mental Health risk
आपको स्टडी के मुताबिक बताएं कि सल्फर डाइऑक्साइड डिप्रेशन के बढ़ते रिस्क से सबसे मजबूती से जुड़ा टॉप पॉल्यूटेंट के तौर पर उभरा है। कार्बन मोनोऑक्साइड और फाइन पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) ने भी मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स के डेवलप होने की आशंका को बढ़ाने में अहम रोल अदा किया है। वहीं, ये रिसर्च आगे बताती है कि ये पॉल्यूटेंट के मिश्रण के कॉन्टेक्ट में आने से डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
रिसर्चर्स का कहना है कि एयर पॉल्यूटेंट्स ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को ट्रिगर करके सेंट्रल नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एयर पॉल्यूशन मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स में कैसे योगदान देता है, इसे पूरी तरह से समझने के लिए और ज्यादा रिसर्च की अभी जरूरत है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
