प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास समय होता है। इस दौरान उनके शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण उन्हें कई तरह की समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। खासतौर पर इस दौरान उनका ब्लड प्रेशर बढ़ने या घटने लगता है। इसके अलावा डायबिटीज, हाथ-पैर सूजन जैसी समस्याएं भी उन्हें काफी होने लगती हैं। इसके अलावा थायराइड भी प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। कई बार तो प्रेग्नेंसी के बाद थायराइड खुद ही ठीक हो जाता है लेकिन कई महिलाओं को यह समस्या डिलीवरी के बाद भी रहता है। तो चलिए आज आपको बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के बाद थायराइड क्यों होता है।
जरुर लें आयोडीन
एक्सपर्ट्स की मानें तो थायराइड की समस्या आमतौर पर महिलाओं को होती है। थायराइड हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन बेहद जरुरी होता है और प्रेग्नेंसी में इसकी मात्रा करीबन 50% ज्यादा होनी चाहिए। डॉक्टर महिलाओं को प्रेग्नेंट होने से पहले और प्रेग्नेंसी में 150-200 mcg आयोडीन की मात्रा लेने के लिए कहते हैं। वहीं महिलाओं को प्रेग्नेंसी के बाद भी आयोडीन लेना चाहिए। प्रेग्नेंसी के बाद भी थायराइड के कुछ कारण हो सकते हैं।

ऑटोइम्यून बीमारियां
कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे टाइप-1 डायबिटीज, विटिलिगो, रुमेटॉयड अर्थराइटिस के कारण भी
डिलीवरी के बाद थॉयराइड की समस्या हो सकती है। एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसी स्थिति में महिलाओं को डॉक्टर की सलाह लेकर ही थॉयराइड कंट्रोल करने की दवाईयां लेनी चाहिए। इससे आप ऑटोइम्यून बीमारियों को समय पर मैनेज कर पाएंगे।
एंटीथायराइड एंटीबॉडीज
ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण एंटीबॉडीज थायराइड की ग्रंथि पर ही हमला करती हैं। इसके कारण थायराइड की ग्रंथि में सूजन आ जाती है। ऐसे में जो महिलाएं डायबिटीज टाइप 1 की समस्या से जूझ रहे हैं उन्हें इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। कुछ महिलाओं को तो डिलीवरी के एक साल बाद ही यह समस्या होने लगती है।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन
एक्सपर्ट्स की मानें को करीब 2 से 8 फीसदी महिलाएं किसी न किसी तरह के थायराइड डिस्फंक्शन से जूझ रही होती हैं ऐसे में थायराइड का फंक्शन न सिर्फ प्रेग्नेंसी से पहले और प्रेग्नेंसी में नॉर्मल होना चाहिए बल्कि डिलीवरी के बाद भी थायराइड नॉर्मल ही होना चाहिए क्योंकि डिलीवरी के बाद थॉयराइड ग्रंथि में सूजन रह जाती है जिसका कारण तनाव, समय पर बैलेंस्ड डाइट न लेना जैसे कई कारण हो सकते हैं।
पहले से थायराइड होना
यदि किसी महिला को प्रेग्नेंसी से पहले थायराइड है तो प्रेग्नेंसी में भी उन्हें यह हो सकती है। डिलीवरी के बाद भी उन्हें ऐसी समस्या हो सकती है। वहीं प्रेग्नेंसी में डॉक्टर थायराइड कंट्रोल करने के लिए दवाईयां भी देते हैं लेकिन बच्चे का जन्म होने के बाद भी उन्हें रहती है।
डिलीवरी के बाद चेक करवाएं थायराइड
एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैसे तो थायराइड के लक्षण डिलीवरी के 3-6 महीने के अंदर दिखते हैं। हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण डिलीवरी के 3-12 महीने के बाद भी दिख सकते हैं जैसे वजन बढ़ना, थकान और काम करने में मन लगना शामिल है। करीब 45-0 फीसदी मामलों में हाइपोथायराइडिज्म ही होता है। यदि महिलाओं को थायराइड के लक्षण दिखे तो उन्हें टेस्ट जरुर करवाने चाहिए।
इस तरह कंट्रोल करें थायराइड
डिलीवरी के बाद महिलाएं कुछ बातों को ध्यान में रखकर थायराइड से छुटकारा पा सकती हैं।
. डिलीवरी के बाद आप बैलेंस्ड डाइट लें।
. डॉक्टर ने यदि कोई दवाई बताई है तो उसे समय पर लें।
. रोज एक्सरसाइज और योगा करें।

. जरुरत से ज्यादा ऑयली और देसी घी में बनी चीजें न खाएं ।
. अपने मन और दिमाग को स्ट्रेस फी रखें। इसके लिए आप मेडिटेशन कर सकते हैं।
प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं का सारा ध्यान सिर्फ बच्चे पर होता है। ऐसे में वह अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखती। यदि आपको इस दौरान शरीर में कोई भी बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। इसके अलावा खान-पान और एक्सरसाइज जरुर करें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
