प्रेगनेंसी न केवल महिलाओं के जीवन का एक खुशहाल समय होता है, बल्कि इसके साथ शारीरिक समस्याएं भी आ सकती हैं। इन समस्याओं में से एक है स्पाइनल ट्रॉमा, जो कि एक कम चर्चा किया जाने वाला लेकिन महत्वपूर्ण पोस्टपार्टम मुद्दा है। स्पाइनल ट्रॉमा महिला की गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

शालिनी पासी का संघर्ष और प्रेरणा

शालिनी पासी का पोस्टपार्टम स्पाइनल ट्रॉमा से उबरने का सफर प्रेरणादायक है। हाल ही में एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रेगनेंसी के बाद उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या हुई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें बैक प्रॉब्लम हो गई थी। शालिनी ने कहा, “मेरे डॉक्टर ने कहा था कि मुझे अपनी स्पाइन में हर चार से छह महीने में इंजेक्शन लेना पड़ेगा, क्योंकि बच्चे को जन्म देने के बाद मेरी टांगों और स्पाइन में संवेदी खो गई थी।”

शालिनी ने डॉक्टर की सलाह का पालन नहीं किया और डांस क्लास जाना शुरू किया, क्योंकि वह डांस करना और हील्स पहनना पसंद करती थीं। उनका मानना था कि इन गतिविधियों से उनकी रिकवरी में मदद मिलेगी।

शालिनी की चमत्कारी रिकवरी

शालिनी ने अपनी रिकवरी को एक चमत्कार मानते हुए बताया, “अब मैं वही डॉक्टर के पास जाती हूं और हर पांच महीने में एक बार चेकअप करवाती हूं। डॉक्टर यह मानते हैं कि यह चमत्कार है कि मैं चल सकती हूं, हील्स पहन सकती हूं और डांस कर सकती हूं।” यह उनका विश्वास था कि योग, सक्रियता और मानसिक दृढ़ता ने उनकी रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पोस्टपार्टम स्पाइनल ट्रॉमा के सामान्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार प्रेगनेंसी और डिलीवरी के दौरान शरीर में होने वाले शारीरिक और यांत्रिक बदलावों के कारण स्पाइनल ट्रॉमा हो सकता है। जैसे:

हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान रीलैक्सिन हार्मोन लिगामेंट्स और जोड़ों को ढीला कर देता है, जिससे स्पाइन अस्थिर हो सकता है।

वृद्धि और दबाव

गर्भाशय का आकार बढ़ने और लम्बर कर्व के कारण पीठ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

लंबा श्रम या यांत्रिक डिलीवरी

लंबे समय तक श्रम या यांत्रिक डिलीवरी से नर्व कंप्रेशन या स्पाइनल इंजरी हो सकती है।

योग और वैकल्पिक उपचार का महत्व

योग और वैकल्पिक उपचार, जैसे कि फिजियोथेरेपी, चिरोप्रैक्टिक केयर और एक्यूपंक्चर, पोस्टपार्टम स्पाइनल ट्रॉमा से उबरने में मदद कर सकते हैं। योग से पीठ और कोर मसल्स को मजबूत किया जा सकता है और लचीलापन में सुधार हो सकता है। भुजंगासन (कोबरा पोज) और मार्जारियासन (कैट-काउ पोज) जैसे आसन शरीर के लचीलेपन और खून के संचलन में मदद करते हैं, जो उपचार को बढ़ावा देते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान स्पाइनल समस्याओं से बचाव के उपाय

सही पोस्टर बनाए रखें

सही तरीके से बैठने और खड़े रहने से स्पाइन पर दबाव कम होता है। सहायक तकिए का इस्तेमाल करें।

शारीरिक सक्रियता बनाए रखें

प्रीनेटल योग या स्विमिंग से कोर और पेल्विक मसल्स को मजबूत करें।

समर्थन देने वाला गियर पहनें

मेटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल करें जो पेट का वजन समान रूप से वितरित करता है।

संतुलित पोषण

कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन डी से भरपूर आहार हड्डियों की सेहत बनाए रखता है।

संतुलित वजन बढ़ाना

अत्यधिक वजन बढ़ने से स्पाइन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, इसलिए वजन को नियंत्रित रखें।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

By tnm

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