चीन में HMPV (ह्यूमन मेटाप्नेयूमोवायरस) के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, और अब भारत में भी इसके कुछ मामले सामने आए हैं। HMPV एक वायरस है जिसकी खोज साल 2001 में हुई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 24 साल बाद भी इस वायरस के लिए कोई प्रभावी वैक्सीन नहीं बनाई जा सकी है। इस लेख में हम जानेंगे कि HMPV वायरस क्या है, इसके लक्षण क्या होते हैं, और क्यों अभी तक इसकी वैक्सीन नहीं बन पाई है।
HMPV वायरस क्या है?

HMPV एक श्वसन संबंधी वायरस है, जो सर्दी, खांसी, बुखार और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण उत्पन्न करता है। यह वायरस बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। इसकी शुरुआत साल 2001 में डच विद्वानों द्वारा हुई थी, जब उन्होंने नासॉफिरिन्जियल एस्पिरेट नमूनों से इस वायरस की पहचान की थी। हालांकि यह वायरस अब तक एक सामान्य फ्लू या सर्दी-खांसी के रूप में ही सामने आता है।
चीन और भारत में HMPV के मामले
चीन में HMPV के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, और भारत में भी अब तक इसके 8 मामले सामने आ चुके हैं। कर्नाटक से 2, गुजरात से 1, कोलकाता से , मुंबई से 2 और चेन्नई से 2 मामले रिपोर्ट किए गए हैं। भारत में इस वायरस को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं क्योंकि इसके लक्षण कोरोना वायरस से मिलते-जुलते हैं। यही कारण है कि इसे महामारी के रूप में फैलने का खतरा महसूस किया जा रहा है।
HMPV के लक्षण और इलाज
HMPV के लक्षण में बच्चों के गले के ऊपरी हिस्से में बलगम जमा होना, सांस से जुड़ी समस्याएं और खांसी शामिल हैं। चीनी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, इस वायरस के खिलाफ कोई प्रभावी एंटीवायरल दवा या टीका नहीं है। कर्नाटक चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने भी कहा है कि इस वायरस का कोई विशेष इलाज नहीं है, और यह नॉर्मल सर्दी-खांसी की तरह ही होता है।
क्यों नहीं बन पाई HMPV की वैक्सीन
HMPV वायरस की वैक्सीन नहीं बन पाई है, इसका मुख्य कारण यह है कि इसके लक्षण आम सर्दी-खांसी की तरह होते हैं, जिससे इसका निदान और उपचार भी सामान्य तरीके से किया जाता है। इसके अलावा इस वायरस पर किए गए शोध में भी जटिलताएं सामने आई हैं। वायरस के उत्परिवर्तन और इसके विभिन्न रूपों की वजह से एक स्थिर और प्रभावी वैक्सीन तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
HMPV से बचाव के उपाय
डॉक्टरों का कहना है कि स्वस्थ बच्चों को इस वायरस से ज्यादा खतरा नहीं है, लेकिन बुजुर्गों और बच्चों को इस पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। एम्स के पूर्व निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि सर्दियों में यह वायरस ज्यादा फैलता है क्योंकि यह हवा में लंबे समय तक जीवित रहता है। ऐसे में सर्दी-खांसी वाले व्यक्ति से दूरी बनाए रखना और बच्चों को स्कूल न भेजना एक अच्छा उपाय हो सकता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
