टीवी एक्ट्रेस पायल रोहतगी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए अपने पिता के इलाज के लिए आर्थिक मदद की अपील की। पायल ने बताया कि उनके पिता 2018 से प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित हैं और 2006 से उनके फेफड़े सिकुड़ने की समस्या भी है। अब उनकी इलाज के लिए पैसों की कमी हो गई है। प्रोस्टेट कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो पुरुषों को खासकर उनकी बढ़ती उम्र में प्रभावित करती है। इस बीमारी का इलाज महंगा और कठिन हो सकता है, लेकिन समय पर इलाज और सही देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
अधिक उम्र के पुरुषों को क्यों होता है?

प्रोस्टेट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो मुख्य रूप से 50 साल से ऊपर के पुरुषों को प्रभावित करती है। इसका मुख्य कारण शरीर में उम्र के साथ होने वाले शारीरिक बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से प्रोस्टेट ग्रंथि में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त टेस्टोस्टेरोन (पुरुष हार्मोन) का असंतुलन और जेनेटिक (वंशानुगत) प्रवृत्तियां भी इस बीमारी के बढ़ने का कारण बन सकती हैं।
अधिक उम्र के पुरुषों में यह बीमारी अधिक होती है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। धूम्रपान, खराब जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान जैसे कारण भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:
पेशाब करने में परेशानी
बार-बार पेशाब आना
मूत्र प्रवाह में कमी
पेशाब करते समय दर्द या जलन (डिसुरिया)
मूत्र और आंत पर नियंत्रण खोना
इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED)
वीर्य या पेशाब में खून आना (हेमेटोस्पर्मिया)
पीठ के निचले हिस्से, कूल्हे या छाती में दर्द
अगर इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, ताकि जल्दी से जल्दी इलाज शुरू किया जा सके।
प्रोस्टेट कैंसर का इलाज
प्रोस्टेट कैंसर के इलाज का तरीका मरीज की आयु, स्वास्थ्य स्थिति, और कैंसर की स्टेज पर निर्भर करता है। प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में कुछ प्रमुख तरीके शामिल हैं:
रेडिएशन थेरेपी
कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए उच्च ऊर्जा वाली किरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
हार्मोन थेरेपी
शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम किया जाता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि धीमी होती है।
इम्यूनोथेरेपी
शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाता है ताकि वह कैंसर से लड़ सके।
एक्टिव सर्विलांस
इस प्रक्रिया में कैंसर के मामलों की नियमित जांच की जाती है और कैंसर की ग्रोथ को मॉनिटर किया जाता है, ताकि इसके नियंत्रण के लिए उपयुक्त कदम उठाए जा सकें।
