मैदा हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। घर न सही, बाहर का तो हम रोज खाते हैं, जिस वजह से शरीर में मैदा चला ही जाता है। हम चटकारे से खाते हैं, लेकिन ये भी पता होना चाहिए कि बाद में शरीर के भी चटकारे निकलते हैं। इसे खाने से हमारे शरीर का हर हिस्सा प्रभावित होता है। वजन तो बढ़ता ही है साथ ही दिल से जुड़ी बीमारियां भी होती हैं। इसलिए इसे सफ़ेद ज़हर भी कहते हैं तो चलिए जानते हैं कि रोज़ाना इसके सेवन से कौन सी परेशानियां हो सकती हैं।

Blood Sugar

मैदे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है जिस कारण इससे बनी कोई भी चीज खाई जाए तो शरीर में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। इसके सेवन से जरूरत से ज्यादा इंसुलिन रिलीज़ होता है। रोज मैदे का खाना खाते हैं तो रोज ये प्रक्रिया होती है और धीरे-धीरे इंसुलिन का प्रॉडक्शन कम हो जाता है, जिस कारण आप ब्लड शुगर के मरीज बन जाते हैं।

पोषण के बिना

मैदे को सफेद दिखाने के लिए ब्लीचिंग प्रोसेस की वजह से कई केमिकल्स से गुजरना पड़ता है। हम ये केमिकल्स खाते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक है। मैदे को बनाने के समय कई प्रॉसेसिंग लेवल से गुजरना पड़ता है। रिफ़ाइनिंग में परत और रेशों को हटा दिया जाता है। जिस वजह से अधिकांश फ़ाइबर और पोषकतत्व जैसे विटामिन्स, मिनरल्स और फ़ाइटोकेमिकल्स ख़त्म हो जाते हैं।

Acidity

जब भी रिफ़ाइनिंग प्रॉसेस होता है तो इस दौरान मैदे का सारा पोषण ग़ायब हो जाता है और इसकी तासीर एसिडिक हो जाती है। और ये काफी चिकना होता है, जिस वजह से हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम इसे ठीक तरह से पचा नहीं पाता। एसिडिक खाने का असर हड्डियों पर पड़ता है। इस वजह से कैल्शियम ख़त्म हो जाता है और हमारी बोन डेंसिटी कम हो जाती है। साथ ही इसके साथ आपको गठिया और इंफ़्लेमेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अपनी डाइट में मैदे की जगह गेहूं और दूसरे अनाज को शामिल करें। मैदे को खाते हैं तो अभी से अपनी आदत को सुधार लें।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *