प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण सांस से जुड़ी समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। दिल्ली, एनसीआर और अन्य प्रदूषित शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे लोग गंभीर शारीरिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) जैसी बीमारियां इन हालात में आम हो गई हैं। इन तीनों बीमारियों के लक्षण काफी हद तक समान होते हैं, जिसके कारण लोग अक्सर इनमें अंतर नहीं कर पाते। आइए जानते हैं इन बीमारियों के लक्षण और पहचानने का तरीका।
अस्थमा (Asthma)

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें फेफड़ों में सूजन और सांस की नलियों में संकुचन हो जाता है, जिससे हवा का प्रवाह रुकता है। इसका मुख्य कारण एलर्जी, प्रदूषण या धुएं का संपर्क हो सकता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है और यदि यह स्थिति गंभीर हो, तो अस्थमा का अटैक भी आ सकता है, और जान भी जा सकती है।
अस्थमा के लक्षण
सांस लेने में कठिनाई और तेज खांसी
सीटी जैसी आवाज सुनाई देना
छाती में घरघराहट या जकड़न महसूस होना
बलगम वाली या बिना बलगम की खांसी
पसीना आना और तेज हार्टबीट
सीओपीडी (Chronic Obstructive Pulmonary Disease)

सीओपीडी एक गंभीर बीमारी है, जो ज्यादातर प्रदूषण, सिगरेट पीने और गंभीर एलर्जी के कारण होती है। इस बीमारी में लंग्स का क्षय होता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है। सीओपीडी के कारण ऑक्सीजन का अवशोषण कम हो जाता है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। यह बीमारी आमतौर पर 25 साल की उम्र के बाद देखी जाती है।
सीओपीडी के लक्षण
बलगम वाली खांसी और सांस में सीटी की आवाज
छाती में घरघराहट और सांस फूलना
छाती में जकड़न और ऑक्सीजन की कमी से होंठों का नीला पड़ना
अत्यधिक थकान और सांस लेने में परेशानी
ब्रोंकाइटिस (Bronchitis)

ब्रोंकाइटिस एक वायरल इंफेक्शन है, जो चेस्ट में होता है और आमतौर पर ठंड लगने, प्रदूषण या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से होता है। यह बीमारी फेफड़ों के नलिकाओं में सूजन पैदा करती है और श्वसन तंत्र में इंफेक्शन को जन्म देती है।
ब्रोंकाइटिस के लक्षण
खांसी के साथ बलगम आना
तेज बुखार और शरीर में दर्द
छाती में बलगम का जमाव
सांस लेने में परेशानी और खून की उल्टियां
बचाव के उपाय
स्मोकिंग से बचें और प्रदूषण के समय बाहर जाने से बचें।
मास्क पहनकर बाहर जाएं ताकि प्रदूषण से बचाव हो सके।
स्टीम लें और गर्म पानी पिएं, इससे श्वसन तंत्र को आराम मिलता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और इम्यूनिटी को मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लें।
इन तीनों बीमारियों के लक्षण भले ही समान हों, लेकिन इनके इलाज और देखभाल के तरीके अलग-अलग होते हैं। इसलिए अगर आपको सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सही सलाह और उपचार लेना बेहद जरूरी है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता के लिए है और किसी भी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए हमेशा विशेषज्ञ से सलाह लें।
