डरना एक आम समस्या है और इंसान के व्यवहार का हिस्सा है। कहीं लोग होते हैं जिन्हें बंद जगहों से डर लगता है, कुछ लोगों के लिफ्ट में घुसते ही पसीने छूटने लगते हैं। ये एक तरह की बीमारी होती है, जिसका नाम क्लॉस्टेरोफोबिया है। इसमें लिफ्ट, बाजार, भीड़ वाली गाड़ी में भी डर महसूस होता है।
Claustrophobia
क्लोस्ट्रोफोबिया, बंद जगहों का डर। बड़ी संख्या में लोग इससे जूझ रहे हैं। जैसे कि लिफ्ट, बस, या अन्य जगहें। जब इंसान इन जगहों से बाहर निकलता है तो वे फिर से पहले जैसा सामान्य हो जाता है। फिलहाल क्लॉस्टेरोफोबिया का कारण पूरी तरह पता नहीं किया गया है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसके लिए तीन फैक्टर प्रमुख हो सकते हैं, जैसे कि जेनेटिक, दिमाग की बनावट और कोई दर्द या एक्सीडेंट।
अगर आपके परिवार में कोई इसका शिकार है तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है। क्लॉस्टेरोफोबिया, ब्रेन की कुछ खास बनावट के कारण भी हो सकता है। इन सबके अलावा किसी बंद जगह में अगर आपके साथ कोई एक्सीडेंट या दर्दनाक अनुभव हुआ है तो भी आप इसके शिकार हो सकते हैं।
लक्षण
क्लोस्ट्रोफोबिया है तो आपको बंद जगहों में डर या चिंता होगी। पसीना आएगा, दिल की धड़कन तेज हो जाएगी और सांस लेन में परेशानी आएगी। आपको चक्कर या बेहोशी भी हो सकती है।
इलाज
Exposure Therapy
एक्सपोजर का मतलब होता है किसी चीज से मिलवाना। इसलिए थेरेपी का नाम एक्सपोजर है। क्लॉस्टेरोफोबिया से परेशान लोगों को एक्सपोजर थेरेपी की मदद से धीरे-धीरे बंद जगहों में रहने की आदत डलवाने की कोशिश की जाती है। जिससे डर खत्म होने लगता है।
Cognitive Behavioral Therapy
अगर आप या आपके आस-पास क्लॉस्टेरोफोबिया से कोई जूझ रहा है तो कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी कारगर हो सकती है। इस थेरेपी से आप अपने डर का सामना कर पाएंगे।
Medicines and Self Techniques
दवाएं भी इसके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन साथ ही इंसान को खुद भी अपने डर का सामना करने की कोशिश करनी चाहिए। उदाहरण के लिए गहरी सांस लेना, दिमाग को रिलैक्स फील करवाना, म्यूजिक सुनना आदि मददगार साबित हो सकते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
