सेप्सिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में संक्रमण के कारण इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी आती है। ये गंभीर और जानलेवा स्थिति है। एक हालिया शोध में पता चला कि सेप्सिस के रोगियों में मृत्यु दर का प्रमुख कारण कैंसर और डिमेंशिया है।
आपको बता दें कि एक अध्य्यन में पता चला कि उम्र और हार्ट डिजीज भी मौत के कारण हो सकते हैं। इन वजहों से भी सेप्सिस के मरीजों में दो वर्षों के भीतर मौत के जोखिम बढ़े हैं।
एकपर्ट्स का कहना
एकपर्ट्स का कहना है कि कुछ विशेष कारक सेप्सिस के बाद मौत के जोखिम को बढ़ाते हैं। इनमें बढ़ती उम्र भी शामिल है। साथ ही डिमेंशिया, कैंसर, हार्ट डिजीज और अस्पताल में भर्ती होने के छह महीने के भीतर सेप्सिस में मौत का खतरा बढ़ना आम है।
714 मरीजों पर अध्य्यन
जानकारी के अनुसार 714 मरीजों पर अक्टूबर 2017 से मार्च 2018 के अंत तक एक दीर्घकालिक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन का उद्देश्य ये जानना था कि इनमें से कितने लोगों की बाद में बीमारी से मौत हुई। जानकारी के अनुसार पता चला कि दो वर्षों के बाद, सेप्सिस से पीड़ित 50.6 प्रतिशत रोगियों की मौत सेप्सिस सहित अन्य कारणों से हुई।
मौत का जोखिम
उम्र बढ़ने के साथ मौत का जोखिम 4 प्रतिशत, कैंसर हिस्ट्री होने के कारण दोगुना, हार्ट डिजीज के मामलों में जोखिम 39 प्रतिशत, डिमेंशिया वाले रोगियों में जोखिम 90 प्रतिशत। इसके साथ ही सेप्सिस के साथ अस्पताल में भर्ती होने के छ: महीनों के अंदर मौत का खतरा 48 प्रतिशत बढ़ जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
