भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय समिति के 77वें सत्र का अध्यक्ष चुना गया है। यह सत्र दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में जेपी नड्डा ने वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और भारत के अनुभवों को साझा किया।

भारत की स्वास्थ्य योजनाओं की सराहना

अपने भाषण के दौरान, जेपी नड्डा ने भारत सरकार की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं का उल्लेख किया, जिनमें आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य योजनाओं में से हैं। इन योजनाओं के तहत 12 करोड़ से अधिक परिवारों को कवर किया गया है, जिनमें हर परिवार को सालाना 6,000 अमेरिकी डॉलर तक का अस्पताल में भर्ती होने का लाभ प्रदान किया जाता है। नड्डा ने इस पहल को भारत की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की एक बड़ी उपलब्धि बताया, जो देश के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है।

डिजिटल स्वास्थ्य में भारत का नेतृत्व

भारत के डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर चर्चा करते हुए नड्डा ने बताया कि भारत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उपयोग करके स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को और बेहतर करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान डिजिटल मिशन, ई-संजीवनी, और आईएचआईपी जैसी योजनाएं डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत को एक नया आयाम दे रही हैं। ये योजनाएं न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। नड्डा ने यह भी बताया कि भारत G-20 के दौरान इन योजनाओं को लॉन्च कर चुका है, जिससे यह साबित होता है कि भारत वैश्विक स्वास्थ्य में नेतृत्व कर रहा है।

पारंपरिक चिकित्सा का योगदान

भारत द्वारा पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी नड्डा ने विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करने का भारत का अनुभव समग्र स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दे रहा है। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं की सीमा का विस्तार हुआ है और भारत इस क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2022 में जामनगर, गुजरात में पारंपरिक चिकित्सा के लिए एक वैश्विक केंद्र की स्थापना की थी, जो भारत के पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र में योगदान का प्रमाण है। इस केंद्र के माध्यम से विभिन्न बीमारियों के इलाज में पारंपरिक चिकित्सा के महत्व को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।

WHO की क्षेत्रीय निदेशक की प्रतिक्रिया

WHO की दक्षिण-पूर्व एशिया समिति की क्षेत्रीय निदेशक, साइमा वाजेद ने भी उद्घाटन सत्र में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जब 1948 में दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए पहली क्षेत्रीय समिति का गठन किया गया था, उस समय वैश्विक स्तर पर शिशु मृत्यु दर 147 प्रति हजार थी। आज यह घटकर 25 हो गई है, जो इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति को दर्शाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे हम पुराने स्वास्थ्य खतरों पर विजय प्राप्त करते हैं, वैसे-वैसे नए खतरों का सामना भी करना पड़ता है। उन्होंने WHO और सभी सदस्य देशों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की और कहा कि 21वीं सदी के साधनों का उपयोग करके इन खतरों का सामना किया जा सकता है।

तीन दिन चलेगी बैठक

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में WHO की शेफ डे कैबिनेट रजिया पेंडसे, भूटान के स्वास्थ्य मंत्री ल्योनपो टंडिन वांगचुक और मालदीव के स्वास्थ्य मंत्री अब्दुल्ला नाजिम इब्राहिम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में विभिन्न स्वास्थ्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

जेपी नड्डा का WHO की क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष के रूप में चयन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे यह साबित होता है कि भारत न केवल अपने देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

By tnm

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