बच्चों को इंफेक्शन और बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में पेरेंट्स को बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरुरत पड़ती है। बच्चों को पांडा यानी की (PANDAS Pediatric Autoimmune Neuropsychiatric Disorders Associated with Streptococcal Infections) सिंड्रोम होने की संभावना रहती है। यह रोग एक दुर्लभ विकार है जो बच्चों में होता है और इसका संबंध स्ट्रेप्टोकोकल इंफेक्शन से होता है। इस सिंड्रोम के कारण बच्चों में अचानक व्यवहारिक और मानसिक बदलाव आ सकते हैं। यह बच्चों की न्यूरोसाइकियाट्रिक (मस्तिष्क और मानसिक) प्रणाली पर असर डालता है। तो चलिए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि बच्चों में यह कैसे होता है और इसके कारण व बचाव के क्या तरीके हैं।

पांडा सिंड्रोम क्या है?

यह एक ऑटोइम्यून विकार है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से मस्तिष्क के कुछ हिस्सों पर हमला करता है। इसका प्रमुख कारण स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण (गले में स्टैफ इंफेक्शन) होता है जो शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को ट्रिगर करता है। जब शरीर स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया से लड़ता है तो कुछ एंटीबॉडी गलती से मस्तिष्क के बेसल गैन्ग्लिया क्षेत्र को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति में अचानक परिवर्तन आ सकता है।

लक्षण

इसके लक्षण अचानक और तेजी से प्रकट हो सकते हैं। आमतौर पर बच्चे जिन्हें यह सिंड्रोम होता है, वे कुछ समय पहले तक तो सामान्य दिखते हैं, लेकिन स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण के बाद उनके व्यवहार में तेजी से बदलाव आते हैं जैसे ।

मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन

बच्चों के मूड में अचानक और बार-बार बदलाव देखने को मिलना, अगर वे अचानक बहुत खुश हो रहे हैं या कुछ ही पलों में गुस्सा कर रहे हैं तो थोड़ा सावधान हो जाएं ।

नींद संबंधी समस्याएं

इससे पीड़ित बच्चे को अनिद्रा या नींद में परेशानी हो सकती है, उन्हें सोने में कठिनाई हो सकती है या वे बार-बार जाग सकते हैं।

ध्यान लगाने में कठिनाई

बच्चों को ध्यान लगाने, पढ़ाई या अन्य कामों में मन लगाने में कठिनाई हो सकती है। यह ध्यान संबंधित समस्याओं के साथ-साथ सीखने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।

मांसपेशियों में झटके (Tics)

बच्चों में चेहरे, हाथ या शरीर के अन्य हिस्सों में अनैच्छिक झटके या मरोड़ पैदा हो सकते हैं। ये झटके शारीरिक और वोकल हो सकते हैं, जैसे बार-बार आंखें झपकाना या गले से आवाज निकालना।

ओसीडी (Obsessive-Compulsive Disorder) होना

बच्चों में अचानक जुनूनी विचार (Obsessions) और अलग तरह के व्यवहार (Compulsions) की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। वे बार-बार हाथ धोने, गिनती करने या किसी खास चीज के बारे में सोचने जैसे काम करने लगते हैं।

एंग्जाइटी और डर बढ़ना

बच्चों में चिंता और डर का स्तर अचानक से बढ़ता है। वे किसी खास स्थिति से बहुत ज्यादा डरने लगते हैं या अनजान चीजों को लेकर अनावश्यक चिंता करने लगते हैं।

कारण

PANDAS सिंड्रोम का प्रमुख कारण स्ट्रेप्टोकोकल बैक्टीरिया से होने वाला इंफेक्शन है लेकिन इसके अलावा भी कुछ अन्य कारण और कारक हैं जो इस स्थिति को बढ़ा सकते हैं।

ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया

इस सिंड्रोम में शरीर का इम्यून सिस्टम स्ट्रेप्टोकोकल बैक्टीरिया से लड़ने के दौरान ब्रेन के बेसल गैन्ग्लिया हिस्से पर गलती से हमला करता है। यह ब्रेन के कार्यों को प्रभावित करता है और व्यवहार में बदलाव लाता है।

पर्यावरणीय कारक

हालांकि स्ट्रेप्टोकोकल इंफेक्शन मुख्य कारण है, लेकिन बच्चों के वातावरण में उपस्थित अन्य संक्रमण, विषाक्त पदार्थ, या तनावपूर्ण परिस्थितियां भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।

कमजोर इम्यून सिस्टम

जिन बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उनमें इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। इसके चलते PANDAS जैसी ऑटोइम्यून प्रतिक्रियाएं विकसित हो सकती हैं।

स्ट्रेप्टोकोकल

PANDAS का सबसे आम कारण स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया से होने वाला इंफेक्शन है, जो गले में दर्द, बुखार और अन्य शारीरिक समस्याओं का कारण बनता है। यह इंफेक्शन इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया को बढ़ाता है जिससे ब्रेन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जेनेटिक

कुछ बच्चों में PANDAS सिंड्रोम होने का जोखिम ज्यादा होता है यदि उनके परिवार में पहले से ऑटोइम्यून विकार या न्यूरोसाइकियाट्रिक विकार की हिस्ट्री रही हो। इससे यह संकेत मिलता है कि जेनेटिक फैक्टर भी इस सिंड्रोम में भूमिका निभा सकते हैं।

PANDAS सिंड्रोम एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है जो बच्चों के मानसिक और व्यवहारिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों को पहचानकर समय पर एक्सपर्ट्स की सलाह लेने से आप बच्चों का बचाव कर सकते हैं।

By tnm

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