हाल ही में एक स्टडी से यह खुलासा हुआ है कि भारत में शारीरिक रूप से निष्क्रिय लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रहा है बल्कि इसका सीधा असर देश की जीडीपी पर भी पड़ रहा है। इस अध्ययन के अनुसार यदि देश के लोग शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा दें, तो 2047 तक भारत की जीडीपी में 15 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो सकता है। साथ ही कर्मचारियों की बीमारियों के कारण अनुपस्थिति से होने वाले 2.5 लाख करोड़ रुपये के नुकसान को भी रोका जा सकता है।
स्वास्थ्य सुधार से आर्थिक लाभ
यह स्टडी ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म डालबर्ग एडवर्टाइजर्स द्वारा किया गया है। इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइंस को मानक बनाकर देशवासियों की शारीरिक सक्रियता का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार यदि लोग नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में भाग लें तो भारत के स्वास्थ्य सुधार से 30 लाख करोड़ रुपये का बचत हो सकता है। इस बचत में मोटापा, हृदय रोग, और मानसिक बीमारियों से संबंधित खर्चों में कमी आ सकती है।
11 करोड़ लोग होंगे स्वस्थ
रिपोर्ट में बताया गया है कि 15.5 करोड़ भारतीय वयस्क और 4.5 करोड़ किशोर शारीरिक गतिविधियों के मामले में डब्ल्यूएचओ के मानकों पर खरे नहीं उतरते। डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक व्यस्क को सप्ताह में कम से कम 150-300 मिनट तक व्यायाम करना चाहिए, जबकि बच्चों और किशोरों को प्रतिदिन 60 मिनट की शारीरिक सक्रियता बनाए रखनी चाहिए। यदि इस दिशा में कदम उठाए जाते हैं, तो 2047 तक 11 करोड़ भारतीय गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) से बच सकते हैं।
आत्महत्याओं में कमी
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा देने से आत्महत्याओं के मामलों में भी कमी आ सकती है। अनुमान है कि 2047 तक आत्महत्याओं के मामलों में 30,000 की कमी हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, सामाजिक सक्रियता और आत्म-सम्मान में वृद्धि से इस दिशा में बड़ा बदलाव आ सकता है।
शहरी लड़कियों और महिलाओं को अधिक खतरा
स्टडी के अनुसार भारत में लड़कियां और महिलाएं खेल-कूद में लड़कों और पुरुषों की तुलना में सप्ताह में 5-7 घंटे कम समय व्यतीत करती हैं। खासतौर पर शहरी लड़कियों और महिलाओं में यह अंतर अधिक है, जिससे वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का अधिक खतरा झेल रही हैं।
इस स्टडी से यह साफ हो जाता है कि देश की शारीरिक फिटनेस को सुधारने से न केवल स्वास्थ्य में बेहतरी आएगी, बल्कि इसका सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
