झारखंड में सिपाही भर्ती की फिजिकल परीक्षा के दौरान 11 अभ्यर्थियों की मौत ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। इस परीक्षा के तहत 10 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होती है, और इसी दौड़ के दौरान अभ्यर्थियों की जान चली गई। इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार दौड़ने से इतनी मौतें कैसे हो गईं? ऐसे में चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
हार्ट अटैक का खतरा
एक्सपर्ट्स के मुताबिक 10 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के लिए कम से कम 6 महीने की तैयारी की आवश्यकता होती है। अचानक इतनी लंबी दौड़ दौड़ने से शरीर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है, जिससे हार्ट पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। अगर दिल पहले से ही किसी बीमारी या कमजोरी से ग्रस्त है, तो इस प्रकार के अत्यधिक दबाव से हार्ट फेल हो सकता है। हालांकि युवाओं में ऐसे मामलों की संभावना कम होती है, लेकिन यह भी संभव है कि पुरानी बीमारियों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई हो।
प्रैक्टिस की कमी और पुरानी बीमारियां
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि किसी को पहले से ही हार्ट या लंग्स की कोई बीमारी है और वह अचानक लंबी दौड़ लगाता है, तो खतरा बढ़ सकता है। हालांकि पूरी तरह से फिट और प्रैक्टिस न करने वाले युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। ऐसे मामलों में मौत का कारण कुछ और हो सकता है, जैसे अत्यधिक थकान या अन्य शारीरिक समस्याएं। इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही सही कारणों का पता चल सकेगा।
स्टेरॉयड का खतरा
वहीं कुछ अभ्यर्थी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए स्टेरॉयड या एनर्जी ड्रिंक का सहारा लेते हैं। स्टेरॉयड कुछ समय के लिए स्टैमिना बढ़ा सकते हैं, लेकिन इनके गंभीर नुकसान भी होते हैं। स्टेरॉयड के उपयोग से हार्ट बीट तेज हो सकती है, और यदि हार्ट रेट 100 बीट प्रति मिनट से अधिक हो जाए, तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
