हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नया ब्लड टेस्ट विकसित किया है जो घातक ब्रेन कैंसर, ग्लीओब्लास्टोमा, को सिर्फ 60 मिनट में सटीकता से पहचान सकता है। यह परीक्षण मात्र एक छोटे ब्लड सेम्पल का उपयोग करके किया जाता है और मौजूदा तरीकों की तुलना में अधिक सटीक है।
क्या है ग्लीओब्लास्टोमा
ग्लीओब्लास्टोमा सबसे सामान्य और घातक प्रकार का ब्रेन ट्यूमर है, और इस नए लिक्विड बायोप्सी के जरिए इसका पता लगाना अब तेज और कम आक्रामक हो गया है। इस विधि में केवल 100 माइक्रोलिटर ब्लड का उपयोग किया जाता है और एक घंटे के भीतर ग्लीओब्लास्टोमा से जुड़े बायोमार्कर्स की पहचान की जा सकती है।
इस परीक्षण के विकास में अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने सहयोग किया है। हालांकि यह अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन यह अवधारणा ब्रेन कैंसर के निदान में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
जानें क्या है यह तकनीक
यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार ग्लीओब्लास्टोमा से पीड़ित औसत रोगी का जीवनकाल निदान के बाद 12 से 18 महीने तक होता है। इस परीक्षण का मूल हिस्सा एक बायोचिप है जो इलेक्ट्रोकाइनेटिक तकनीक का उपयोग करके बायोमार्कर्स का पता लगाता है। इनमें सक्रिय एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर्स (EGFRs) शामिल हैं, जो ग्लीओब्लास्टोमा जैसे कुछ कैंसर में अत्यधिक मात्रा में पाए जाते हैं और ये एक्स्ट्रासेल्युलर वेसिकल्स में मौजूद होते हैं।
इस तकनीक को लेकर शोधकर्ताओं ने क्या कहा
ह्सुएह-चिया चांग, जो नोट्रे डेम में केमिकल और बायोमोलेक्युलर इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं और इस अध्ययन के मुख्य लेखक हैं, ने कहा एक्स्ट्रासेल्युलर वेसिकल्स या एक्सोसोम्स, विशेष नैनोपार्टिकल्स होते हैं जो कोशिकाओं द्वारा स्रावित किए जाते हैं। ये बड़े होते हैं, एक अणु से 10 से 50 गुना बड़े और इनमें एक कमजोर चार्ज होता है। हमारी तकनीक को विशेष रूप से इन नैनोपार्टिकल्स के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो इनकी विशेषताओं का लाभ उठाती है।
शोधकर्ताओं के लिए चुनौती दोहरी थी
एक ऐसी प्रक्रिया विकसित करना जो सक्रिय और गैर-सक्रिय EGFRs के बीच अंतर कर सके और एक ऐसी डायग्नोस्टिक तकनीक बनाना जो रक्त नमूनों से सक्रिय EGFRs की पहचान करने में संवेदनशील और चयनात्मक दोनों हो। इस परीक्षण को नियर टर्न-की फंक्शनलिटी के रूप में वर्णित किया गया है, जो इसे अन्य ज्ञात तरीकों की तुलना में अधिक उपयोगी और प्रभावी बनाता है।
यह नया परीक्षण ब्रेन कैंसर के इलाज और निदान में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है, जो भविष्य में अधिक व्यापक और सटीक निदान के लिए संभावनाएं खोल सकता है।
