हाल ही में पंजाब स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के वित्त विभाग से 25 करोड़ रुपये की मांग की है। यह राशि राज्य के सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में कार्यरत मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के लिए योजनाबद्ध सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए आवश्यक है। इस योजना का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है, जिसमें उनके कार्यस्थल पर सुरक्षा और भलाई की देखभाल की जा सके।
अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने राज्य भर के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-मंडलीय अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि स्थायी इंतजाम होने तक होम गार्ड्स की तैनाती की जाएगी, खासकर मेडिकल कॉलेजों में। इसके अलावा महिला स्टाफ की सुरक्षा के लिए मेडिकल कॉलेजों में गोल्फ कार्ट्स भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सुरक्षित तरीके से अस्पताल से अपने हॉस्टल तक पहुंच सकें।
पंजाब में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के मामले
पंजाब में हाल के महीनों में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, खासकर सरकारी अस्पतालों में सेवा देने वाले डॉक्टरों के साथ। पिछले एक महीने में ही डॉक्टरों के खिलाफ शारीरिक हमले या मौखिक दुर्व्यवहार की आठ घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को उजागर करती हैं। सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा की अपर्याप्तता के कारण मेडिकल स्टाफ, विशेषकर रात की शिफ्ट में काम करने वाले डॉक्टर, लगातार खतरे में रहते हैं। इस स्थिति के चलते उनके काम के बोझ और तनाव में भी बढ़ोतरी होती है, क्योंकि मानव संसाधन की कमी उनके लिए एक बड़ी चुनौती है। कई मामलों में मौखिक दुर्व्यवहार की घटनाएं रिपोर्ट ही नहीं की जातीं।
इन जगहों से सामने आए है मामले
हाल के दिनों में राजपुरा, पटियाला, डेरा बाबा नानक, जगराओं, सुनाम, संगरूर, नौशेरा मझा सिंह और फिरोजपुर जैसे स्थानों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (PCMSA) ने इनमें से कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि अन्य मामलों में आरोपियों से माफी मंगवाई गई।
नर्सों और डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार
20 अगस्त को जगराओं सिविल अस्पताल में दो व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें से एक मरीज था, जो कथित तौर पर शराब के नशे में था और उसने मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट और धमकी दी। उन पर पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ मेडिकल सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकल सर्विस इंस्टिट्यूशन एक्ट की धारा 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया। इसी तरह 16 अगस्त को फिरोजपुर सिविल अस्पताल में एक महिला अटेंडेंट ने आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ मौखिक दुर्व्यवहार और धमकी दी थी।
स्वास्थ्य विभाग से तुरंत कार्रवाई करने की मांग
PCMSA के अध्यक्ष डॉ. अखिल सरिन ने हाल के पंजाब में हुई घटनाओं और पश्चिम बंगाल में एक डॉक्टर की हत्या के मद्देनजर, स्वास्थ्य विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन ने प्रत्येक अस्पताल की सुरक्षा जरूरतों का व्यापक मूल्यांकन करने की भी मांग की है, जिसमें शिफ्ट के हिसाब से आवश्यक गार्ड्स की संख्या, अस्पताल के भवन का नक्शा और अन्य आवश्यक बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए योजना बनाई जाएगी।
अस्पतालों में गार्ड्स की तैनाती
200 बिस्तरों वाले अस्पतालों के लिए सुबह की शिफ्ट में 10 गार्ड्स, शाम की शिफ्ट में 4 गार्ड्स और रात की शिफ्ट में 4 गार्ड्स, और प्रत्येक उप-जिला अस्पताल के लिए कम से कम 6 गार्ड्स तथा प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 4 गार्ड्स की तैनाती की जाएगी।
डॉ. बलबीर सिंह मामले को लेकर क्या बताया
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल पेशेवरों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि PCMSA से प्राप्त फीडबैक के आधार पर, स्वास्थ्य विभाग ने सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए वित्त विभाग से धनराशि मांगी है। वहीं पंजाब सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि वे बिना किसी भय के अपनी सेवाएं दे सकें।
