बच्चे के जन्म के बाद नए पैरेंट्स का भी जन्म होता है। हर पेरेंट्स का यह फर्ज होता है कि वह अपने बच्चे के खाने-पीने और सोने के पैटर्न का पूरी तरह से ध्यान रखें लेकिन आजकल के वर्किंग पेरेंट्स बच्चों का तो ख्याल रखते हैं लेकिन जब बात बच्चे की स्लीप साइकिल की आती है तो पेरेंट्स उस पर ज्यादा फोकस नहीं करते। पेरेंट्स बच्चे के सोने और जागने के समय पर ध्यान नहीं देते हैं। पेरेंट्स को लगता है कि बच्चा यदि रात को 12 बजे सोता है और सुबह 8 बजे सोता है तो ठीक है बाकि पेरेंट्स की तरह अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो यह बिल्कुल गलत है। बच्चों की सेहत के लिए रात को एख समय पर सोना और सुबह एक निश्चित समय पर उठना बहुत जरुरी है। तो चलिए जानते हैं कि बच्चों को किस समय पर सोना चाहिए और इसका क्या कारण है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

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बच्चों को कितने बजे सोना चाहिए

डॉ. पवन का कहना है कि बच्चे के सही शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उसे रात को 9-10 के बीच सो जाना चाहिए। दरअसल, रात के समय बच्चों के हार्मोन्स ग्रोथ के लिए सबसे सही समय होता है। ऐसे में यदि बच्चा देर तक जागता है तो इससे न सिर्फ उनकी ग्रोथ कम हो सकती है बल्कि शारीरिक तौर पर भी उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। डॉक्टर के अनुसार, बच्चों के ग्रोथ हार्मोन सबसे ज्यादा एक्टिव तब होते हैं जब वह गहरी नींद में सो रहे होते हैं।

बच्चों के लिए जरुरी है इतने घंटे की नींद

एक बच्चे को रोजाना 9-10 घंटों की नींद लेना जरुरी है। यदि आपका बच्चा रात को 9 बजे सो जाता है और सुबह 8 बजे तक उठता है तो इसका अर्थ है कि उसे आराम से 9-10 घंटे की नींद मिल रही है जो बच्चे के विकास के लिए जरुरी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चा जितने ज्यादा देर तक गहरी नींद में सोता रहेगा उसके शरीर के ग्रोथ हार्मोन उतने ही ज्यादा एक्टिव होंगे। डॉ. का कहना है कि यदि पेरेंट्स बच्चे के सोने का सही सर्कल बना पाते हैं तो इससे उनका दिमाग ज्यादा शॉर्प और इंटेलिजेंट होगा।

बच्चों को गहरी नींद में कैसे सुलाएं

यदि आपको ऐसा लगता है कि आपका बच्चा गहरी नींद में नहीं सोता या उसे सही तरह से नींद नहीं आ रही तो यह उसके विकास में बाधा बन सकता है। बच्चे को गहरी नींद में सुलाने के लिए आप कुछ तरीके अपना सकते हैं।

खेलने दें

बच्चे को बाहर पर्याप्त खेलने के लिए भेंजे ताकि वे शारीरिक तौर पर थक जाएं और इससे उन्हें बेहतर नींद आए। डॉक्टर का कहना है कि बच्चे को रोजाना कम से कम 1 घंटा बाहर खुली हवा में खेलना चाहिए ताकि उसके शरीर की एनर्जी काम में आ सके।

रोशनी कम करें

कोशिश करें कि कमरे में रोशनी कम करें और सुनिश्चित करें कि कमरे में पूरी तरह अंधेरा हो। बच्चे के कमरे के लिए अच्छी क्वालिटी के मोटे पर्दे खरीदें ताकि बाहर की रोशनी उसे परेशान न करे।

ज्यादा टाइट न हो कपड़े

इस बात का ध्यान रखें कि रात को सोते समय आपका बच्चा जो भी कपड़े पहन रहा है वो हवादार हों और बहुत ज्यादा टाइट न हो। शरीर में ज्यादा चिपके हुए कपड़े पहनने से भी बच्चों को नींद में परेशानी आ सकती है।

कमरे के तापमान का रखें ध्यान

इस बात का ध्यान रखें कि कमरे का तापमान बहुत ज्यादा गर्म या फिर बहुत ज्यादा ठंडा न हो।

इन सब बातों को आजमाने के बाद भी यदि आपके बच्चे को पूरी और गहरी नींद नहीं आती तो इस पर अपने डॉक्टर से बात करके सलाह जरुर लें।

By tnm

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