दिमाग का सामान्य से अधिक तेजी से विकसित होना इंसान के लिए अच्छा नहीं बल्कि खतरे का संकेत है। एक नई स्टडी के मुताबिक दिमाग का तेजी से विकास मनुष्यों में बौद्धिक विकलांगता या ऑटिज्म विकसित होने की आशंका को बढ़ाता है। बेल्जियम के फ्लेमिश इंस्टीट्यूट फॉर बायोटेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं का यह स्टडी न्यूरॉन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। मुख्य शोधकर्ता बेन वर्मार्के के अनुसार इस स्टडी के निष्कर्ष बौद्धिक विकलांगता और ऑटिज्म के इलाज को समझने और विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मस्तिष्क का विकास और नियोटेनी
बता दें कि मस्तिष्क की कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स को पूरी तरह से परिपक्व होने में वर्षों समय लगते हैं, जिसे नियोटेनी कहा जाता है। यह प्रक्रिया मनुष्यों में उन्नत संज्ञानात्मक यानी सोचने-समझने की क्षमताओं को विकसित करने में अहम होती है। जीन SYNGAP1 इन न्यूरॉन्स को लंबे समय तक विकसित होने में मदद करता है और दिमाग के सही काम करने के लिए महत्वपूर्ण है। स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि इस जीन में परिवर्तन या उत्परिवर्तन इस प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं, जिससे बौद्धिक अक्षमता और ऑटिज्म हो सकता है।
चूहे के दिमाग ने खोला राज
शोधकर्ताओं ने इस जीन के प्रभाव को समझने के लिए चूहों के मस्तिष्क में उत्परिवर्तित SYNGAP1 जीन वाले मानव न्यूरॉन्स को प्रत्यारोपित किया। उन्होंने देखा कि इन उत्परिवर्तित न्यूरॉन्स का विकास सामान्य से बहुत तेजी से हुआ और वे अन्य न्यूरॉन्स के साथ तेजी से जुड़ गए। हालांकि ये न्यूरॉन्स दिखने में सामान्य लगते थे, लेकिन उनका तेजी से विकास उन्हें अपेक्षित समय से पहले ही दृश्य जानकारी का जवाब देने में सक्षम बना रहा था। यह संकेत देता है कि दिमाग का तेज विकास ऑटिज्म और बौद्धिक विकलांगता का कारण बन सकता है।
भारत में ऑटिज्म की स्थिति
ऑटिज्म एक मानसिक विकार है, जिससे प्रभावित व्यक्ति को सोचने, संवाद करने, बातचीत करने और सामाजिक संकेतों को समझने में कठिनाई होती है। ईटीहेल्थ वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 1.8 करोड़ लोग ऑटिज्म से ग्रस्त हैं। इसके अलावा दो से नौ साल की उम्र के लगभग 1 से 1.5 प्रतिशत बच्चे भी इससे प्रभावित हैं। यह संख्या भारत में ऑटिज्म के बढ़ते प्रकोप को दर्शाती है और इस समस्या को समझने और इसके प्रभावी इलाज की आवश्यकता को दर्शाती है।
