इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 चल रहे हैं। बीते दिन यानी की 7 अगस्त को वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू से सभी को मैडल की उम्मीद थी लेकिन वह कोई धमाल नहीं कर पाई और मेडल लेने से चुक गई। मीराबाई क्लीन एंड जर्क से अपने आखिरी प्रयास में 114 किलोग्राम वजन नहीं उठा पाई और ऐसे ही मेडल की रेस से बाहर हो गई। वहीं 8 अगस्त यानी की आज मीराबाई का 30वां जन्मदिन था इसके चलते उनके पास इतिहास रचने का सुनहरा मौका था, लेकिन यह इवेंट खत्म होने के बाद मीराबाई ने यह बताया कि उनके पीरियड का तीसरा दिन था ऐसे में उनके लिए यह काफी मुश्किल था।
मेडल मिस हो गया
मीराबाई चानू ने कहा कि आज के परफॉर्मेंस से बहुत खुश हूं, सभी लोग यह जानते हैं कि मैंने काफी इंजरी फेस की है। रियो (2016 ओलंपिक) में मेरे साथ क्या हुआ था यह बात सभी को पता है। वहां मेरे हाथ से मेडल मिस हो गया था। ऐसा हर खिलाड़ी के साथ होता है। उसके बाद मैं वर्ल्ड चैंपियन बनी। टोक्यो ओलंपिक में मैंने भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। इस बार भी मैंने कोशिश की लेकिन इंजरी के कारण एशियन गेम्स में मेरा क्या हाल हो गया था, यह बात सभी को मालूम है। उसके बाद मैं 4-5 महीने रिहैब में चली गई। पेरिस ओलंपिक में बहुत कम टाइम था। मैंने पूरी कोशिश की लेकिन ऐसा न हो सका।

वहीं ओलंपिक की परफॉरमेंस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज मेरी किस्मत भी खराब थी और फीमेल की प्रॉब्लम (पीरियड्स) भी थे, पीरियड्स का आज तीसरा दिन था जब मैं लास्ट ओलंपिक में खेल रही थी तब मेरा उस दौरान पीरियड का दूसरा दिन था जब मैं लास्ट ओलंपिक में खेल रही थी तब मेरा उस दौरान पीरियड्स का दूसरा दिन था लेकिन मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। इस बार मेडल नहीं दे पाई इसके लिए मैं सबसे माफी मांगती हूं लेकिन यह मेरी किस्मत में नहीं था।
सिर्फ एक किलोग्राम वजन से नहीं जीत पाई मेडल
मीराबाई 8 अगस्त यानी की आज 30 साल की हो गई हैं। ऐसे में जन्मदिन पर वह इतिहास रचने का मौका था लेकिन वह चूक गई। 49 किग्रा भार वर्ग में उतरी मीराबाई ने स्नैच राउंड में बेहतरीन प्रयास किया था और इस राउंड के बाद तीसरे नंबर पर वही रही थी। उन्होंने इस राउंड में 88 किलोग्राम बेस्ट वजन उठाया था। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उनसे काफी उम्मीदें भी थी। मगर यहां पर उन्होंने निराश किया। मीराबाई चानू ने स्नैच में 88 और क्लीन एवं जर्क में 111 से कुल 199 किलोग्राम का वजन उठाया। इससे वह सिर्फ एक किलोग्राम के पदक से चूक गई। स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार चीन की मौजूदा ओलंपिक चैंपियन होऊ झिहुई ने क्लीन और जर्क में ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने कुल 206 किलोग्राम वजन उठाया।

रोमानिया की वालेंटिना कैम्बेई 206 (93 और 112) किग्रा से रजत और थाईलैंड की सुरोदचना खाम्बो 200 (88 और 112) किग्रा के वजन से कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं.
आखिरी कोशिश में मीराबाई नहीं उठा सकीं वजन
क्लीन एंड जर्क के पहले प्रयास में मीराबाई ने 111 किग्रा वजन उठाने की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रही। इसके बाद उन्होंने तुरंत दूसरे ही प्रयास में यह 111 किग्रा वजन उठाया और मेडल की दावेदारी ठोकी। इसके बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क के तीसरे और आखिरी प्रयास में 114 किग्रा वजन उठाना चुना। मगर वो इसे सफलतापूर्वक नहीं उठा पाई और वो पेरिस ओलंपिक में चौथे नंबर पर रहती हुई बाहर हो गई।
टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई ने जीता था सिल्वर
मीराबाई के पास मेडल जीतकर ओलंपिक में इतिहास रचने का मौका था वो ओलंपिक में दो मैडल जीतने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बन सकती थी। उनसे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी 2000 में ब्रॉन्ज जीता था। उनका यह रिकॉर्ड तो मीराबाई ने टोक्यो में सिल्वर जीतकर ही तोड़ दिया था। 30 साल की मीराबाई चानू ने पिछले यानी की टोक्यो ओलंपिक में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता था। तब उन्होंने 202 किग्रा वजन उठाकर यह मेडल जीता था। टोक्यो ओलंपिक के बाद उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन राष्ट्रमंडल खेल 2022 में रहा जहां उन्होंने 201 किग्रा उठाया।
