आजकल के लोग घर के खाने से ज्यादा बाहर का खाना खाना पसंद करते हैं। जहां पहले के समय में लोग घर का बना टेस्टी खाना पसंद करते थे वहीं आज कल के बच्चे स्ट्रीट फूड्स को ही ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। खासतौर पर युवा जनरेशन इन सब चीजों की बहुत आदि हो गई है। इन सब खराब आदतों के कारण युवाओं में मोटापे की दिक्कत बढ़ती जा रही है। लोग प्रोसेस्ड फूड और चीनी बहुत ज्यादा खा रहे हैं जिसके कारण दिन ब दिन उनका स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है। अब नए आर्थिक सर्वेक्षण की मानें तो भारत में 54% बीमारियां अनहेल्दी डाइट के कारण हो रही हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जताई चिंता
इस आर्थिक सर्वेक्षण में यह कहा गया है कि मोटापा एक चिंताजनक स्थिति है। लोगों को हेल्दी लाइफस्टाइल जीने में सक्षम बनाने के लिए जरुरी उपाय की जरुरत है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए सर्वेक्षण में कहा कि भारत में एडल्ट आबादी के बीच मोटापा एक गंभीर चिंता के तौर पर उभर रहा है। यदि भारत को अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाना है तो यह जरुरी है कि लोगों को स्वास्थ्य पैरामीटर बैलेंस्ड और डाइवर्स डाइट की ओर बढ़े।
जंक फूड पर दी आईसीएमआर ने रिपोर्ट
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आर्थिक सर्वेक्षण में यह कहा गया कि शुगर और फैट की ज्यादा मात्रा वाले प्रोसेस्ड फूड्स के बढ़ते कंजंप्शन के कारण लोगों को शारीरिक गतिविधियां कम हो गई है। इसके साथ ही उनकी अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थ खाने की आदत भी सीमित हो गई है। आजकल इन्हीं गलतियों के कारण लोग ओवरवेट हो रहे हैं और उनमें न्यूट्रिएंट्स की कमी देखी जा रही है। वर्ल्ड ओबिसिटी फेडरेशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सर्वेक्षण में यह कहा गया है कि अनुमान बताते हैं कि भारत में किसी एडल्ट में मोटापे का दर तीन गुना से ज्यादा हो गया है और भारतीय बच्चों में मोटापे का दर वियतनाम और नामीबिया के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा है।
ओबिसिटी पर इकोनॉमिक सर्वे
सर्वेक्षण में आगे यह कहा गया है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, मोटापे की समस्या भारत के गांव की तुलना में शहरों में ज्यादा है। शहरों में पुरुषों में मोटापे का दर 29.8% है जबकि गांव में यह 19.3% है। 18-69 आयु वर्ग में मोटापे का सामना करने वाले पुरुषों का प्रतिशत NFHS-4 में 18.9% से बढ़कर NFHS-5 में 22.9% हो गया है। महिलाओं के लिए यह 20.6% (NFHS-4) से बढ़कर 24% (NFHS-5) हो गया है। कुछ राज्यों में बढ़ती उम्र की आबादी के साथ-साथ मोटापा एक चिंताजनक स्थिति में भी पहुंच चुका है। ऐसे में लोगों को अपना लाइफस्टाइल को सुधारने के लिए जरूरी उपाय करने चाहिए। दिल्ली जैसे राज्यों में मोटापे से ग्रस्त महिलाओं का अनुपात 41.3% है, जबकि पुरुषों के लिए यह 38% है। तमिलनाडु में पुरुषों में मोटापा 37% और महिलाओं में 40.4% है और वहीं आंध्र प्रदेश की बात करें तो महिलाओं के लिए यह 36.3% है, जबकि पुरुषों में 31.1% है।
