बच्चे अक्सर बाहर का खाना खाने के शौकीन होते हैं लेकिन उनकी इम्यूनिटी पॉवर बहुत कमजोर होती है। इसके कारण उनमें कई तरह के रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। जब बच्चे बाहर का जंक फूड खाते हैं तो उनके पाचन तंत्र के साथ-साथ लिवर पर भी असर होता है। ऐसे में यदि बच्चे लगातार बाहर का खाते हैं तो उनमें लिवर इंफेक्शन या लिवर संबंधी समस्या होने की संभावना होती है। लिवर संबंधी रोग होने पर बच्चों में कुछ लक्षण नजर आते हैं। यदि आप शुरुआत में इन लक्षणों पर गौर करते हैं तो बच्चों का इलाज किया जा सकता है। आइए आपको बताते हैं कि बच्चों में लिवर इंफेक्शन होने पर क्या लक्षण दिखते हैं।
बच्चों में लिवर रोगों के कारण
बच्चों में लिवर से संबंधी रोगों के लिए अनुवांशिक कारण हो सकते हैं इनमें से एक है अल्फा 1 एंटीट्रिप्सिन की कमी। एंटीट्रिप्सन नाम का प्रोटीन बनता है जो रक्त प्रवाह में जाना है जब ये तत्व रुक जाता है तो बच्चों में लिवर रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा भी बच्चों में लिवर इंफेक्शन के कई कारण सकते हैं जैसे हेपिटाइस, ए, बी और सी आदि।
लिवर रोगों के लक्षण
पेट में दर्द और गैस
लिवर संबंधी किसी भी तरह की समस्या के चलते बच्चों को भोजन पचाने में समस्या होने लगती है। इसके अलावा बच्चों को पेट में गैस भी बन सकती है।
बोन डेंसिटी कम होना
जिन बच्चों को लिवर की समस्या होती है उनको हड्डियों से जुड़ी समस्या भी हो सकती हैं। लिवर प्रॉब्लम होने पर बच्चों को बोन डेंसिटी होने लगती है जिससे उनमें हड्डियां टूटने की संभावना बढ़ जाती है।
बच्चे को मल पीला आना
बच्चों में लिवर के इंफेक्शन और लिवर में सूजन होने के कारण उनके मल का रंग पीला हो जाता है। यदि आपके बच्चे के मल का रंग भी पीला हो रहा है तो ये बिलरुबिन का स्तर बढ़ने से हो सकता है।
भूख न लग पाना
बच्चे के लिवर में इंफेक्शन या अन्य रोगों के कारण उन्हें भूख भी कम लगती है। भूख कम लगने के कारण उन्हें पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में बच्चों का विकास भी रुकता है और वजन भी तेजी से कम होने लगता है। इसे लिवर की समस्या का मुख्य लक्षण माना जाता है।
पीलिया होना
बच्चों में लिवर रोग होने पर उन्हें पीलिया भी हो सकता है। लिवर में जब बिलरुबिन का स्तर प्रभावित होता है तो बच्चों में पीलिया जैसे लक्षण दिखते हैं इस समस्या के कारण बच्चों की त्वचा और आंखों का रंग पीला हो जाता है।
इलाज
बच्चों में लिवर संबंधी रोग के मुख्य कारण के आधार पर ही डॉक्टर उनका इलाज करते हैं। ऐसे में यदि बच्चों में ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण नजर आए तो आप डॉक्टर से सलाह जरुर लें।
