भारत इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े चांदीपुरा वायरस प्रकोप का सामना कर रहा है। आपको बता दें कि यह वायरस रेबीज़ परिवार का सदस्य है और मस्तिष्क में सूजन का कारण बनता है। चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ़्लाइज़ के माध्यम से फैलता है, लेकिन मच्छर और किट भी इसे फैला सकते हैं।
चांदीपुरा वायरस के लक्षण
शुरुआती लक्षण फ्लू के समान होते हैं, जिसमें बुखार, सिरदर्द और उल्टी शामिल है। लेकिन ये लक्षण तेजी से (24 से 48 घंटों में) एन्सेफलाइटिस, कोमा और मृत्यु तक बढ़ा सकते हैं। वहीं 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इस वायरस से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। आपको बता दें कि यह अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में कैसे प्रवेश करता है, लेकिन माना जाता है कि संक्रमित कीट के काटने से यह वायरस व्यक्ति के ब्लडफ्लो में प्रवेश करता है।
जानें वायरस दिमाग को कैसे करता है प्रभावित
वायरस के मस्तिष्क में प्रवेश के बाद यह सुरक्षात्मक रक्त-मस्तिष्क अवरोध को प्रभावित करता है और मस्तिष्क कोशिकाओं में फैलता है। वायरस मस्तिष्क में फॉस्फोप्रोटीन नामक प्रोटीन स्रावित करता है, जो इसकी तेजी से प्रसार और घातकता का कारण हो सकता है।
चांदीपुरा वायरस का इलाज
बता दें कि चांदीपुरा वायरस से संक्रमित लोगों के लिए फिलहाल कोई एंटीवायरल दवा या टीका उपलब्ध नहीं है। यह वायरस पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में पहचाना गया था। 2003 में आंध्र प्रदेश में पहला बड़ा प्रकोप हुआ, जहां 329 बच्चों में से 183 की मृत्यु हो गई। 2005 में गुजरात में एक और प्रकोप हुआ, जिसमें 26 मामलों में 78% की उच्च मृत्यु दर दर्ज की गई।
वर्तमान में वायरस का प्रकोप
वहीं हाल के प्रकोप ने गुजरात में 100 से अधिक लोगों को प्रभावित किया है, जिसमें 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर विशेष रूप से भारी प्रभाव पड़ा है। वायरस के तेजी से फैलने और इसके लक्षणों की गंभीरता ने सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को चिंता में डाल दिया है।
अन्य देशों में पाए गए इसके मामले
हालांकि चांदीपुरा वायरस का भौगोलिक वितरण भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित रहा है, लेकिन इसके लक्षण और मामले अन्य क्षेत्रों में भी पाए गए हैं, जैसे पश्चिमी अफ़्रीका और श्रीलंका। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से इस वायरस के प्रसार में वृद्धि हुई है, क्योंकि तापमान में वृद्धि के कारण कीड़ों की गतिविधि बढ़ी है।
भारत में मच्छर जनित वायरस के बढ़े मामले
वहीं इस साल की गर्मी में भारत ने मच्छर जनित वायरस के कई मामलों का सामना किया, जिसमें ज़ीका, डेंगू और निपाह शामिल हैं। चांदीपुरा वायरस के प्रकोप ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती तापमान कैसे नए रोगों के उभरने में भूमिका निभा सकते हैं।
