अस्पताल में अक्सर डिलीवरी के बाद महिलाओं को सरकार की तरफ से कुछ राशि दिए जाते हैं, यह तो हम सभी जानते हैं। लेकिन कभी आपने यह सुना है कि डिलीवरी की राशि पुरुषों के खाते में भी जाते हैं। दरअसल हाल ही में झारखंड के कोडरमा जिले में स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां पुरुषों के खातों में भी डिलीवरी राशि भेजा गया है। बता दें कि अस्पतालों में जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को प्रसव के बाद 1400 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, ताकि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिल सके। इस योजना का मकसद सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करना और महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि सतगावां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इस योजना के तहत होने वाली रकम को पुरुषों के खातों में भी भेज दिया गया। एक ही महिला के खाते में एक दिन में 14 बार राशि ट्रांसफर की गई। यह मामला तब उजागर हुआ जब योजना की राशि एक ही महिला के बैंक खाते में 14 बार ट्रांसफर हुई। इस तरह से मानो एक ही महिला का एक दिन में 14 बार प्रसव हुआ हो।
इस शख्स पर लगा भ्रष्टाचार का आरोप
इस स्वास्थ्य केंद्र पर योजना के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप क्लर्क अजीत कुमार पर लगा है। जानकारी के मुताबिक क्लर्क अजीत अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर योजना के नाम पर घपलेबाजी कर रहा था। इसके अलावा खुद के बैंक अकाउंट और दूसरे पुरुषों के खाते में भी जननी सुरक्षा योजना के नाम पर राशि ट्रांसफर किये जाते थे।
जांच के लिए टीम का गठन
हालांकि मामले के खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई की शुरुआत कर दी है। क्लर्क अजीत कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया है और स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर एक पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है। यह टीम मामले की जांच कर रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी।
वहीं योजना की राशि पुरुषों के खाते में भेजे जाने को लेकर ब्लॉक के जन प्रतिनिधि भी उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही इस मामले को जिला परिषद सदस्य नीतू कुमारी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। हालांकि मामला खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य केंद्र का क्लर्क अजित कुमार फरार है और उसने विभाग को कोई जवाब नहीं दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घोटाले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता का विश्वास टूट रहा है और इस तरह के मामलों से सरकार की योजनाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस मामले की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ही जनता का विश्वास पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
