हाल ही में राष्ट्रीय बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी (आईएपी) और वैदेही इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर ने मिलकर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 100 प्रशिक्षकों ने एक साथ 4,300 लोगों को बीएलएस और सीपीआर का प्रशिक्षण दिया। बता दें कि इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र का आयोजन मंगलवार को हुआ। जिसमें एम्बुलेंस चालक, नर्स, शिक्षक, यातायात पुलिस, अपराध शाखा के अधिकारी और आईटी पेशेवर जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल हुए।
जीवन रक्षक कौशल का महत्व
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनाकर पृथ्वीराज ने इस अवसर पर कहा कि आपात स्थिति में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। बीएलएस और सीपीआर कौशल कई लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन कौशलों का सही और तुरंत उपयोग करने से मरीज की जान बचाई जा सकती है, विशेषकर उन स्थितियों में जहां अस्पताल पहुंचने में समय लगता है। बीएलएस और सीपीआर तकनीकों के सही और समय पर उपयोग से हार्ट अटैक, डूबने, और सांस रुकने जैसी स्थितियों में लोगों की जान बचाई जा सकती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तार
वहीं इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 100 प्रशिक्षकों ने भाग लिया, जिन्होंने विभिन्न समूहों में लोगों को प्रशिक्षित किया। एम्बुलेंस चालक और नर्स जैसे फ्रंटलाइन वर्कर्स के अलावा, शिक्षक, यातायात पुलिस और अपराध शाखा के अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इसका उद्देश्य था कि समाज के विभिन्न हिस्सों में जीवन रक्षक तकनीकों का प्रसार किया जा सके, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद उपलब्ध हो सके।
आईएपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेश
आईएपी यानी इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जी. वी. बसवराज ने कहा कि स्वास्थ्य पेशेवरों, सरकारी एजेंसियों और जनता के साथ काम करके हम लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीएलएस और सीपीआर का प्रशिक्षण केवल स्वास्थ्यकर्मियों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आम जनता को भी इसका ज्ञान होना चाहिए। इससे आपातकालीन स्थितियों में तुरंत और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य
बता दें इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था लोगों को बीएलएस और सीपीआर जैसी महत्वपूर्ण जीवन रक्षक तकनीकों से परिचित कराना। इन तकनीकों का प्रशिक्षण पाकर, आम लोग भी किसी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्रदान कर सकते हैं। कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों ने इन तकनीकों को सीखकर अपने आस-पास के लोगों की मदद करने की जिम्मेदारी को महसूस किया।
