केंद्रीय बजट 2024 के संदर्भ में सोमवार को मनस्थली वेलनेस की संस्थापक और निदेशक ज्योति कपूर ने केंद्र सरकार से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर लगाए गए 18% जीएसटी को हटाने की अपील की है। वहीं कॉउन्सलिंग साइकोलॉजिस्ट दिव्या मोहिंद्रू ने भारत के मानसिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए व्यापक नीतियों को बनाने और इस क्षेत्र में कार्यबल बढ़ाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बताया बताया कि देश में करीब 150 मिलियन लोगों में से जिन लोगों को मेंटल हेल्थ सर्विस की जरूरत है, उनमें से केवल 30 मिलियन से भी कम लोगकी पहुंच हो पाती है।
उन्होंने ने बताया कि भारत में मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की कमी भी बहुत बड़ी परेशानी है। वहीं देश में प्रति 100,000 लोगों पर केवल 0.3 साइकेट्रिस्ट, 0.07 साइकोलॉजिस्ट और सिर्फ 0.07 सामाजिक कार्यकर्ता उपलब्ध हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य की सेवाओं को उपयोगी और किफायती बनाने के लिए इस टैक्स को खत्म करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जीएसटी का प्रभाव
विशेषज्ञों के मुताबिक वर्तमान में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर 18% जीएसटी लागू है, जो कि इन सेवाओं की लागत को बढ़ाता है और कई लोगों के लिए इन्हें प्राप्त करना कठिन बना देता है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में डिप्रेशन, स्ट्रेस, और टेंशन लोगों में तेजी से बढ़ रही हैं और इनका इलाज महंगा हो सकता है। जीएसटी लागू होने के कारण इन सेवाओं की लागत में इजाफा हुआ है, जिससे वे आम लोगों के लिए और भी अधिक महंगी हो गई है।
विशेषज्ञों की सिफारिशें
बता दें कि सोमवार को विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर जीएसटी हटाने से कई लाभ हो सकते हैं, जैसे कि-
सुलभता में वृद्धि
जीएसटी हटाने से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम होगी, जिससे अधिक लोग इन सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे समाज में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में वृद्धि होगी और अधिक लोगों को समय पर सहायता मिलेगी।
सामाजिक प्रभाव
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने और लोगों को प्रोफेशनल मदद प्राप्त करने में मदद करने के लिए इस टैक्स को हटाना आवश्यक है। इससे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज की धारणा में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार
टैक्स हटाने से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम होगी, जिससे संस्थान और पेशेवर बेहतर सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होंगे। इससे मानसिक स्वास्थ्य की सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है।
बजट पर प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस अपील पर गंभीरता से विचार करना चाहिए क्योंकि यह कदम मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। केंद्रीय बजट 2024 में यदि इस सिफारिश को शामिल किया जाता है, तो इससे लाखों लोगों को राहत मिल सकती है और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
बता दें कि सरकार ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वित्त मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस सिफारिश पर ध्यान देंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है और सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।
