बीते दिनों चांदीपूरा वायरस ने गुजरात में बहुत से लोगों को अपनी चपेट में लिया था। वहीँ अब इस वायरस ने राजस्थान में भी अपने पैर पसार लिए हैं। ये वायरस अधिकतर बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। इस वायरस की चपेट में आने वाले लोगों में बुखार और फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह वायरस सीधा दिमाग पर असर डालता है। यदि मरीज का सही समय पर इलाज न कराया जाये तो उसकी जान भी जा सकती है। ऐसे में आपको भी इस वायरस के लक्षण और बचाव के उपाय के बारे में जानने की जरूरत है।

आखिर क्या है चांदीपुरा वायरस

आपको बता दें चांदीपुरा वायरस रबडोविरिडे फैमिली का एक आरएनए (RNA) वायरस है। यह सबसे ज्यादा मादा फ्लेबोटोमाइन मक्खी से फैलता है। इसके फैलने के पीछे मच्छर में पाए जाने वाले एडीज जिम्मेदार होते हैं। यह वायरस अधिकतर 9 महीने से 14 साल तक के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। वहीँ ग्रामीण इलाकों में इसका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है। चांदीपुरा वायरस से पीड़ित व्यक्ति के इलाज के लिए अभी तक कोई एंटी वायरल दवा मौजूद नहीं है।

इस वायरस का नाम चांदीपुरा कैसे पड़ा

बता दें महाराष्ट्र के नागपुर जिले स्थित चांदीपुरा गांव में साल 1966 में बीमारी फैली थी। जिसकी चपेट में कई बच्चे आये थे। इस वायरस से कुछ बच्चों की जान तक चली गई थी। वहीँ नागपुर के चांदीपुरा में इस वायरस की पहचान हुई थी, इसलिए इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ गया। महाराष्ट्र के बाद चांदीपुरा वायरस के मामले साल 2004 से 2006 और 2019 में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में पाए जा चुकें हैं।

चांदीपुरा वायरस के लक्षण

ये वायरस अधिकतर बारिश के समय कीट, पतंग, मच्छर और मक्खियों से फैलता है

मरीज में सबसे पहले बुखार और फ्लू होता है

उल्टी-दस्त की शिकायत होती है, साथ ही सिरदर्द रहता है

कई मरीजों को ऑटोइम्यून एन्फेलाइटिस यानी दिमाग में सूजन जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है

इस वायरस से बचने के उपाय

अपने आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें

घर के आसपास पानी जमा न होने दें

बच्चों को मच्छर और कीट-पतंग से बचाने के लिए फुल स्लीव्स के कपड़े पहनाएं

रात को सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें

बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें

आखिर क्यों ये सीधे मस्तिष्क पर हमला करता है

ये वायरस सीधे मस्तिष्क पर हमला करता है। इस वायरस की चपेट में आने वाले बच्चों में पहले सामान्य वायरस की तरह बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं। बाद में अचानक बच्चे कोमा में चले जाते हैं। अब ऐसे में इस वायरस की खबर आने के बाद स्वास्थ्य एजेंसियां भी अलर्ट हो गई हैं।

चार बच्चों की जा चुकी है जान

गुजरात के साबरकांठा और अरवल्ली जिले में चांदीपुरा वायरस की चपेट में आने से चार बच्चों की जान जचुकी है। जिले के हिम्मतनगर के सिविल अस्पताल में इस वायरस से संक्रमित दो बच्चों का इलाज भी चल रहा है। सभी बच्चों के खून के सैंपल पुणे की राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजे गए हैं ताकि चांदीपुर वायरस के बारे में जांच की जा सके। राजस्थान स्थित उदयपुर के आदिवासी इलाके के दो बच्चों में भी इस वायरस के लक्षण पाए गये हैं।

By tnm

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