आज कल योग की तरफ बहुत से लोग रुख कर रहे हैं। वहीँ हमारे शास्त्रों में योग के कई महत्त्व बताये गये हैं। ऐसे में यदि आप भी हर रोज योग करते हैं तो आप खुद को शारीरिक और मानसिक तौर से फ्रेश और फिट रख सकते हैं। वहीँ अगर योग के साथ ध्यान की बात की जाये तो सोने पर सुहागा हो जाता है। बता दें योग और ध्यान करने से इसका असर हमारे सुनने की क्षमता में भी सुधार करता है। यानिकि हमारे कानों के लिए योग काफी लाभदायक है। योग और ध्यान कान के स्वास्थ्य की रक्षा और उसे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

योगासन से सुनने की क्षमता में सुधार

एक्सपर्ट के मुताबिक हमारे कान सिर्फ सुनने के लिए ही नहीं बल्कि संतुलन बनाए रखने के लिए भी जरूरी हैं। वहीं आजकल कानों से जुड़ी कई सारी बीमारियां हो रही हैं जैसे

टिनिटस यानी कानों में बजना

कानों में संक्रमण

उम्र बढ़ने के कारण या तेज आवाज के संपर्क में आने के कारण सुनने की क्षमता खोना

वहीँ तनाव और खराब लाइफस्टाइल इन स्थितियों को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कुछ योगासन की मदद से सुनने की क्षमता में सुधार किया जा सकता है।

कानों की हेल्थ के लिए कौन-कौन से योगासन फायदेमंद

विपरीत करनी आसन

यह मुद्रा पूरे सिर और कान क्षेत्र में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करती है। यह आसन आपके दिमाग को तनाव मुक्त करने का काम करती है। जो कि बेहतर सुनने की क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

इस आसन को करने के लिए पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं।

अपने हाथों को जमीन से चिपकाकर रखें।

अब अपने पैरों को दीवार के सहारे 45 डिग्री कोण पर उठाएं।

हाथों से कमर को सहारा देते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं

टांगों को तब तक उठाएं जब तक ये बिलकुल सीधी ऊपर नहीं हो जाती ।

इस पोजीशन में कम से कम 3 से 4 मिनट रहें और गहरी सांस लें।

अब धीरे-धीरे सामान्य पोजिशन में आ जाएं और आराम करें।

इस आसन का अभ्यास करने से पहले ध्यान रखें कि आपका पेट खाली हो।

सुबह-सुबह ये योग करना अच्छा माना जाता है।

अगर सुबह वक्त नहीं मिलता है तो आप रात को सोने से पहले ये आसन कर सकते हैं।

बालासन

बालासन भी बहुत ही प्रभावी आसन है यह आपके कानों को सुरक्षा देने में मदद कर सकता है। इस मुद्रा को करने से सिर और कानों में ब्लड फ्लो काफी अच्छे से होता है, जिससे जमाव और दबाव कम होता है।

इस आसन को करने के लिए मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।

दोनों टखनों और एड़ियों को आपस में छुएं।

धीरे-धीरे घुटनों को बाहर की तरफ निकालें

फिर अपने दोनों हाथों को सिर की सीध में ऊपर की तरफ लाएं।

सांस छोड़ते हुए आगे की तरफ जाएं और हथेलियों को जमीन पर टिकाएं

अब सिर को जमीन पर रख दें।

कुछ देर इस मुद्रा में रहें।

मत्स्यासन

इसके अलावा मत्स्यासन कर सकते हैं। इसे फिश पोज के नाम से जाना जाता है। यह आसन छाती और गले को खोलता है। यह मुद्रा ऊपरी शरीर में परिसंचरण में सुधार करती है और कान की परेशानी से राहत दिलाने में मदद कर सकती है।अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, कर्ण रंध्र धौति आसन करने से भी फायदा मिलता है।

By tnm

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