कितना अच्छा लगता है जब किसी अस्पताल में पैदा हुए बच्चे की आवाज सुनाई दे। दरअसल यूँ तो ये आवाज हर असपताल में आना नार्मल बात है लेकिन भोपाल स्थित एम्स में ये आवाज आना कोई आम बात नहीं है। आपको बता दें इस अस्पताल में अब जल्द ही आईवीएफ की सुविधा शुरू करने की तैयारी की चल रही है। जिसकी मदद से कई परिवारों में बच्चे की किलकारियां गूंज सकेगीं। मिली जानकारी की मुताबिक एम्स भोपाल प्रदेश का ऐसा पहला अस्पताल होगा, जहां किसी सरकारी अस्पताल में आईवीएफ ट्रीटमेंट शुरू किया जाना है।

डिजिटल और एआई तकनीक का होगा इस्तेमाल

आपको बता दें एम्स भोपाल के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने बताया कि एम्स में आईवीएफ उपचार सुविधा बहुत जल्द शुरू होने की उम्मीद है। यह सुविधा प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल में पहली सरकारी सुविधा बन जाएगी। आईवीएफ स्किल लैब कई उच्च-निष्ठा डिजिटल सिमुलेटर के साथ एक प्रशिक्षण सुविधा है, जो डॉक्टरों को आईवीएफ प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में बांझपन उपचार और आईवीएफ के लिए आवश्यक विभिन्न प्रक्रियाओं, जैसे हिस्टेरोस्कोपी, डिंब पिक-अप और भ्रूण स्थानांतरण का अभ्यास करने में सक्षम बनाती है। ये सिमुलेटर आधुनिक डिजिटल और एआई तकनीक पर आधारित हैं और प्रशिक्षुओं के लिए अलग-अलग कठिनाई स्तरों के साथ कई तरह की प्रक्रियाओं और मामलों को शामिल करते हैं।

आईवीएफ ट्रीटमेंट क्या है

आज कल के लाइफ स्टाइल में सभी चीजें बदल गई हैं। लोगों के जीवन जीने का तरीका पूरी तरह से बदल चूका है। ऐसे में इसका काफी असर महिलाओं पर भी पड़ रहा है। दरअसल आज कल के खानपान और रहन सहन की वजह से महिलाओं की प्रेग्नेंसी पर काफी असर देखने को मिल रहा है। इन सब के कारण महिलाओं को कंसीव करने में भी दिक्कतें आती हैं। यदि कंसीव हो भी जाए तो मिसकैरेज जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। ऐसे समस्याओं से ही निजात पाने के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट लिया जाता है। आईवीएफ को इन विट्रो फर्टीलाइजेशन कहते हैं। जब महिला का शरीर ऐग को फर्टिलाइज करने में सक्षम नहीं होता है, तो उसे लैब में फर्टिलाइज कराया जाता है। इसमें महिला के अंडे और पुरुष के स्पर्म को मिलाया जाता है। एक बार जब इसके संयोजन से भ्रूण का निर्माण हो जाता है, तो उसे वापस महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो, आईवीएफ ट्रीटमेंट स्त्री के ऐग और पुरुष के स्पर्म को लैब में फर्टिलाइज करके भ्रूण का निमार्ण किया जाता है। उसके बाद उस भ्रूण को वापस महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। इसे आईवीएफ कहते हैं। आईवीएफ को हिंदी में भ्रूण प्रत्यारोपण भी कहा जाता है और आईवीएफ के द्वारा जन्में शिशु को टेस्ट ट्यूब बेबी कहा जाता है।

By tnm

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