कहते हैं अंगदान करना पुण्य काम होता है ऐसा इसलिए क्योंकि अंगदान करने से किसी को नई जिंदगी मिल सकती है। मौजूदा दौर में ऐसे कई लोग हैं जिसकी किसी बीमारी की वजह से बॉडी का ऑर्गन फेल हो जाता है तो उसे किसी नए ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। भारत में हर साल 200,000 किडनी रिप्लेसमेंट की ज़रूरत होती है लेकिन इनमे से सिर्फ़ कुछ की ही ऑर्गन ट्रांसप्लान हो पाता है। ऐसे में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरतों को देखते हुए 77वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने अब ऑर्गन ट्रांसप्लांट स्ट्रैटिजी की मसौदा प्रस्ताव मंजूरी दे दी है। आईए इस मामले के बारे में विस्तार से जानते हैं।
गरीब और विकसित दोनों देशों के लिए आसान
हाल ही में 77वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली ने दुनिया भर में ऑर्गन ट्रांसप्लांट जिसमें ऊतकों और मानव कोशिकाओं का उपयोग करने वाले अंग पर चर्चा की गई है और इसे अधिक उपलब्ध बनाने के लिए एक मसौदा प्रस्ताव को मंजूरी दी। साथ ही वह इस प्रोजेक्ट के माध्यम से गरीब और विकसित दोनों देशों के लोगों के लिए ऑर्गन ट्रांसप्लांट तक की पहुंच को आसान बनाना चाहते हैं।
क्या है मसौदा प्रस्ताव का उद्देश्य
बता दें कि इस मसौदा का मुख्य उद्देश्य सभी सदस्य देशों से ऑर्गन डोनैशन में सुधार करने के लिए ग्लोबल प्लान बनाना है। साथ ही इस प्लान को 2026 में इम्प्लीमेंट किया जाएगा। वहीं मसौदा में बताया गया है कि डब्ल्यूएचओ के द्वारा बताए गए सिद्धांतों और गाइडनेस का पालन करना कितना जरूरी है। स्पेशली तब जब मरे लोगों की अंगदान की संख्या बढ़ाने की बात आती है ताकि उनका उपयोग पूरी तरह से इलाज में किया जा सके। वहीं बहुत ज्यादा लोगों को ऑर्गन डोनैशन करने के लिए प्रेरित करना है।
सभा में दान के तरीकों पर जोर
वहीं देशों पर दबाव डाला जा रहा है कि वे ऑर्गन डोनैशन को अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों का एक सामान्य हिस्सा बनाएं जिसमें मृतकों से दान भी शामिल है। इस मसौदे का लक्ष्य न्यूरोलॉजिकल और अगर जरूरी हो तो Circulatory death के बाद दान करने को सीमित कर दिया गया है। बता दें कि इस दोहरे दृष्टिकोण पद्धति का उद्देश्य चिकित्सा और नैतिक मानकों का पालन करते हुए उपलब्ध अंगों से अधिकतम लाभ प्राप्त करना है। डायरेक्टर जरनल से वैश्विक रणनीति बनाने और उसे क्रियान्वित करने में मदद के लिए एक विशेषज्ञ समूह बनाने को कहा जा रहा है। दरअसल यह ग्रुप ऑर्गन डोनैशन करने वाले के बीच उठने वाले जटिल समस्याओं को समझने में मदद करेगा।
इसे लेकर क्या है राष्ट्रीय चुनौतियाँ
हाल के आंकड़ों के मुताबिक भले ही दुनिया भर में अंग दान की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है लेकिन आपूर्ति अभी भी ज़रूरत के 10% से ज़्यादा को पूरा नहीं कर पाती है। अगर हम भारत की बात करें तो इसकी भारी कमी है, हर साल उन्हें 200,000 किडनी रिप्लेसमेंट की ज़रूरत होती है लेकिन सिर्फ़ कुछ ही उपलब्ध हैं। इससे पता चलता है कि इस समस्या को तुरंत हल करना कितना जरूरी है।
