जालंधर: छोटे अस्पताल में आने वाले मरीज को इमरजेंसी में किस तरह से बेहतर इलाज दिया जाये, ताकि वो मरीज ख़राब न हो। इसके बारे में और अधिक जानकारी देने के लिए वर्ल्ड इमरजेंसी मेडिसिन डे के उपलक्ष्य में आज जालंधर के एनएचएस अस्पताल की तरफ से एक दिन का साइंटिफिक प्रोग्राम का आयोजन किया गया। ये वर्कशॉप दो आर्गेनाईजेशन SEMI और CAHO के साथ मिलकर की गयी। इस वर्कशॉप में इमरजेंसी में मरीजों के लिए जीवनरक्षक किस तरह से होना है, उस पर एनएचएस अस्पताल के डॉक्टर्स की तरफ से आये हुए शहर के विभिन्न डॉक्टर्स को जानकारी दी गयी। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रजव्लित करके की गयी।
देखने में पेशेंट ठीक है, लेकिन ख़राब होने के चांसेस रहते हैं

एनएचएस अस्पताल के डायरेक्टर और न्यूरो सर्जन डॉ. नवीन चितकारा ने कहा कि आज की वर्कशॉप आम वर्कशॉप से थोड़ी हट कर रखी गयी। पहले जैसे किसी एक टॉपिक पर डीप बात की जाती है। लेकिन इसमें पेशेंट सेफ्टी को लेकर अलग अलग टॉपिक पर बात की गयी। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज का इलाज जहां कहीं भी हो रहा है वो बेहतर और सेफ तरीके से हो।

डॉ. ने बताया की इस साइंटिफिक प्रोग्राम के जरिये उन अस्पताल के डॉक्टर्स को जानकारी दी गयी है जिन्हें एक ही डॉक्टर चला रहे हैं और जहां पर हर सुविधा नहीं होती है। ऐसे में उन हॉस्पिटल्स में जो पेशेंट आते हैं उन्हें कैसे मैनेज कर पाए। उन्होंने कहा कि देखने में कई बार हमें पेशेंट ठीक लगते हैं,

लेकिन उसके ख़राब होने के चांसेस होते है, ऐसे में उन्हें कैसे identify करना है, ये गुर बताये गये। अगर कोई मरीज हेड इंजरी के साथ आया है, लेकिन वो अपने होश में है, वहीँ उसका ct स्कैन भी नार्मल है। तो ऐसे में ये जानना जरुरी है कि ct स्कैन करवाने के बाद ऐसी कौन सी प्रॉब्लम है जिसे समझने की जरूरत है।
मरीज के ट्रीटमेंट में सुधार

एनएचएस अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शुभांग अग्रवाल ने बताया कि अगर पेशेंट को सांप ने काट लिया है और वो बेहोशी की हालत में हॉस्पिटल में इमरजेंसी में आ रहा है तो सभी हॉस्पिटल्स को मरीज को क्या स्टैण्डर्ड ऑफ़ ट्रीटमेंट देना चाहिए, जिस से के पेशेंट ख़राब न हो और उसको प्रॉपर ट्रीटमेंट सही समय पर मिल जाये।

इन्ही गाइडलाइन्स के बारे में जानकारी दी गयी। वहीं उन्होंने पॉलीट्रॉमा के बारे में जानकारी दी, जिसमे शरीर में कई तरह की चोटें लगती है। ऐसे में उन्हें गंभीर और बेशोशी की हालत में लाया जाता है, तो उन्हें कैसे बेसिक लाइफ सपोर्ट देना है, उसके बार में पता होना बेहद जरुरी है।
किन किन बातों का रखना है ध्यान

एनएचएस अस्पताल के न्यूरो फिजिशियन डॉ. संदीप गोयल ने बताया कि किस तरह से एक डॉक्टर वाला अस्हॉपताल अपने अस्हॉपताल में इमरजेंसी में आने वाले मरीज को बेहतर तरीके से इलाज दे सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे अस्पताल में आने वाले मरीज को उस अस्पताल में एक सेफ्टी मिले, ताकि मरीज को किसी और अस्पताल में जाना ही न पड़े।

उन्होंने ये भी बताया कि अगर मरीज का सांस फूल रहा, चोट लगी हो, छाती में दर्द की शिकायत हो रही हो, बेहोश हो या फिर पेट में ही क्यों न दर्द हो रहा हो, ऐसे में उसे इमरजेंसी में आने के बाद क्या उपचार देना है, वो सारी चीजें होनी जरुरी है, ताकि मरीज सेफ हो पाए।
इस साइंटिफिक प्रोग्राम में शहर के 200 अधिक डॉक्टर्स ने भाग लिया।

आपको बता दें ये कार्यक्रम आने वाले सभी डॉक्टर्स के लिए खास रहा। आज के प्रोग्राम में 200 से अधिक डॉक्टर्स ने शिरकत की।

वहीँ इस कर्यक्रम में एनएचएस हॉस्पिटल के डायरेक्टर्स जिनमे न्यूरोसर्जन डॉ. नवीन चितकारा, ऑर्थोपेडिक डॉ. शुभांग अग्रवाल, न्यूरोफिजिशियन डॉ. संदीप गोयल सहित एनएचएस अस्पताल के जनरल सर्जन डॉक्टर डॉ नरेंदर पॉल, पल्मोनरी मेडिसिन के डॉ. विनीत महाजन, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. साहिल सारेन, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुरभि महाजन, पीडियाट्रिशियन डॉ. पुनीत बाली, gynaecologist डॉ. ईशा मौजूद रहीं। इसके अलावा इस कार्यक्रम में पीएमसी के सदस्य डॉ. एसपीएस सूच , पंजाब के स्वास्थ्य विभाग के उप निदेशक, डॉ. रमन शर्मा और डॉ. जगदीप चावला (जालंधर के सिविल सर्जन) जैसे बड़े अधिकारियों ने भी शिरकत की। उन्होंने अपने भाषणों में डॉक्टरों को इमरजेंसी चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार तरक्की करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में सी.ए.एच.ओ (कन्फेडरेशन ऑफ एक्रिडिटेड हेल्थकेयर ऑर्गनाइजेशन्स) के योगदान को भी सराहा गया। सी.ए.एच.ओ मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कार्यक्रम चलाता है।
