आज जहाँ एक तरफ हमारा देश बुलंदियों की उचाईयों पर है, वहीँ देश से एक ऐसा मामला सामने आया है जो काफी शर्मनाक है। दरअसल एक पति ने बेटे की चाह में अपनी 8 माह की गर्भवती पत्नी का पेट काट दिया। अब ऐसे में कोर्ट ने उस पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बता दें ये मामला साल 2020 का बताया जा रहा है, जिस पर कोर्ट ने अब फैसला सुनाया है।

आपको बता दें बदायूं के रहने वाले पन्ना लाल के पहले से पांच बेटियां है। अब छठीं बार पत्नी अनीता 19 सितम्बर 2020 को आठ महीने की गर्भवती थी। पन्नालाल आए दिन बेटे की चाहत में पत्नी से झगड़ा और मारपीट करता था। जब छठी बार पत्नी अनीता गर्भवती हुई तो 8 महीने की गर्भवती अनीता के पेट में पल रहे बच्चे को देखने के लिए उसके पति पन्नालाल ने उसका पेट दराती से चीर दिया। बता दें पन्नालाल पेट में पल रहे बच्चे को देखना चाह रहा था कि आखिर लड़का है या लड़की। ऐसे में पेट कटते ही पत्नी की हालत गंभीर हो गयी और वह खून से लथपथ थी। वहीं बच्चियों ने पिता को पेट चीरते हुए देखा और शोर मचा दिया था। इसके बाद गंभीर हालत में अनीता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन पेट को फाड़ देने के कारण गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। वहीँ अनीता को बहुत मुश्किल से बचाया जा सका था।
कोर्ट ने सुनाया फैसला
बता दें इस शर्मनाक हरकत के बाद मामला कोर्ट में चल रहा था। जिसके बाद अब कोर्ट ने पन्नालाल को लाइफटाइम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही स्पेशल कोर्ट ने महिला अपराध के न्यायाधीश सौरभ सक्सेना ने चार साल पुराने मामले में दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
आखिर की है देश में लिंग की जाँच करवाने के नियम
आपको बता दें कि साल 1994 में भारत की संसद ने प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट लागू किया था। जिसे प्रोहिबिशन ऑफ सेक्स सिलेक्शन एक्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस अधिनियम के अनुसार, गर्भधारण के बाद भ्रूण के लिंग की पहचान करने के लिए किसी भी तकनीक का उपयोग करना अवैध है। यह महिला भ्रूण के गर्भपात को रोकने के लिए कार्रवाई में आया, जो भारत में अभी भी एक आम बात है। इस अधिनियम के तहत:-
अल्ट्रासाउंड और एमनियोसेंटेसिस जैसी मशीनों के जरिए बच्चे का लिंग जांच करने पर प्रतिबंध है।
जांच करने वाले सभी संस्थानों को अधिनियम के तहत पंजीकृत होना चाहिए।
सभी संस्थानों को एक नोटिस प्रदर्शित करना होगा जो बताएगा कि इस कानून के तहत लिंग जांच करना जुर्म है।
हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख आरवी अशोकन ने इसको लेकर कही ये बात
आपको बता दें हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख आरवी अशोकन ने कहा है कि भ्रूण का लिंग पता करने पर रोक लगाने से कन्या भ्रूण हत्या तो रुक सकती है, लेकिन इससे बच्ची के पैदा होने के बाद उसकी हत्या नहीं रोकी जा सकती। ये बात अशोकन ने न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में कही है। उनके मुताबिक IMA मौजूदा प्री-कंसेप्शन और प्री-नेटल डायग्नॉस्टिक टेक्नीक (PC-PNDT) एक्ट में बदलाव के लिए एक डॉक्यूमेंट तैयार कर रहा है। मौजूदा कानून भ्रूण के लिंग का पता लगाने के लिए प्री-नेटल डायग्नॉस्टिक टेक्नीक पर रोक लगाता है और ऐसा करने वाले डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराता है। इसमें हमारी तरफ से एक सुझाव ये है कि क्यों न भ्रूण के लिंग का पता लगाया जाए और फिर कन्या भ्रूण की रक्षा की जाए।
