आये दिन हार्ट अटैक से लोगों की जान जाने के मामले सामने आ रहे हैं। एक ऐसा ही मामला लखनऊ से सामने आया है, जहां एचडीएफसी बैंक की महिला अधिकारी की अचानक मौत ने सभी को हैरान कर दिया। 45 वर्षीय सदफ फातिमा, जो गोमतीनगर के विभूतिखंड ब्रांच में कार्यरत थीं, लंच के समय कुर्सी पर बैठी ही थीं कि अचानक बेसुध होकर गिर पड़ीं। उनके सहकर्मियों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस ने उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, ताकि मौत की सही वजह का पता चल सके। डॉक्टरों ने प्राथमिक तौर पर हार्ट अटैक की संभावना जताई है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का असली कारण स्पष्ट हो सकेगा।
क्या है पूरा मामला
यह दुखद घटना मंगलवार को हुई जब सदफ फातिमा लंच करने के लिए अपने ऑफिस की कुर्सी पर बैठीं थीं। अचानक वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गईं, जिससे उनके सहकर्मी घबरा गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने सदफ फातिमा के परिवार और उनके सहयोगियों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
वर्क प्रेशर के कारण हो रही आकस्मिक मौतें
वहीं इस घटना को काम के अत्यधिक दबाव और तनाव का नतीजा बताया जा रहा है। दरअसल इन दिनों निजी कंपनियों और सरकारी विभागों के कर्मचारियों पर काम का प्रेशर बढ़ने की वजह से उनके शरीर पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियों और सरकारी विभागों को काम की शर्तों और दबाव के कारण कर्मचारियों की हो रही आकस्मिक मौतों को गंभीरता से लेना चाहिए और इसके समाधान के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए।
पहले भी आ चूका है ऐसे का मामला
यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले भी पुणे में एक 26 वर्षीय महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट की मौत हो चुकी है। वह ईवाई कंपनी में कार्यरत थी और उसके परिजनों ने दावा किया है कि अत्यधिक वर्क प्रेशर के कारण उसकी मौत हुई थी। इस मामले में केंद्रीय मंत्री ने भी कंपनी से जानकारी मांगी थी।
काम के घंटे और दबाव को संतुलित करना जरुरी
वर्क प्रेशर के कारण हो रही आकस्मिक मौतें अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा कार्य परिस्थितियायां कर्मचारियों के लिए सुरक्षित हैं? क्या कंपनियां अपने कर्मचारियों की भलाई का ख्याल रखते हुए काम के घंटे और दबाव को संतुलित कर रही हैं? यह समय है कि कंपनियां और सरकारें मिलकर इस दिशा में कदम उठाएं, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
सदफ फातिमा की मौत ने न केवल उनके परिवार और सहकर्मियों को सदमे में डाला है, बल्कि यह एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है कि कार्यस्थलों पर कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं?
