दुनिया में कई ऐसी दुर्लभ बीमारियां है, जिसका इलाज तो है लेकिन काफी महंगा है. वहीं अगर किसी गरीब को ये बीमारी हो जाए तो उनका बुरा हाल हो जाता है. दरअसल गढ़ी मलियान से एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक तीन साल की मासूम युक्ति दुर्लभ रक्त विकार डायमंड ब्लैकफैन एनीमिया (DBA) से जूझ रही है। यह बीमारी उसके जीवन के पहले महीने से ही उसकी जान पर भारी पड़ रही है। युक्ति को एक महीने की उम्र से ही खून चढ़ाया जा रहा है, और अब तक उसे लगभग 50 बार खून चढ़ाया जा चुका है। इतने इलाज के बाद भी उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है, और अब बोन मेरो ट्रांसप्लांट ही उसकी एकमात्र उम्मीद है।
युक्ति के परिवार की परेशानियां
युक्ति के माता-पिता, ज्योति और शाभा सिंह, इस मुश्किल घड़ी में बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। जब उन्हें अपनी बेटी की इस दुर्लभ बीमारी का पता चला, तो उनका दिल टूट गया। आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि परिवार अब सरकार और एनजीओ से मदद की गुहार लगा रहा है ताकि युक्ति का इलाज संभव हो सके।
स्वास्थ्य समस्याएं
खून की बार-बार ट्रांसफ्यूजन के कारण युक्ति के शरीर में आयरन की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है। इसका असर उसके लिवर, किडनी और दिल पर नकारात्मक रूप से पड़ रहा है। पिछले कुछ महीनों में उसकी हालत और बिगड़ गई है, जिससे उसे निजी अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। युक्ति के इलाज में बोन मेरो ट्रांसप्लांट ही आखिरी उपाय है, लेकिन इसकी लागत इतनी अधिक है कि परिवार इसे कैर्री नहीं कर सकता।
डायमंड ब्लैकफैन एनीमिया क्या है

डायमंड ब्लैकफैन एनीमिया (DBA) एक दुर्लभ रक्त विकार है, जो जीन में होने वाले बदलावों के कारण होता है। इस बीमारी में अस्थि मज्जा पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन नहीं कर पाता। लाल रक्त कोशिकाएं फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने का काम करती हैं। इस बीमारी के लक्षणों में थकान, दिल की धड़कन का तेज होना, त्वचा का नीला पड़ना, और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। यह बीमारी आमतौर पर जीवन के पहले वर्ष के दौरान सामने आती है।
इलाज की लागत और चुनौतियां
डॉ. राजेश शर्मा, जो युक्ति का इलाज कर रहे हैं, का कहना है कि इस स्थिति का एकमात्र इलाज बोन मेरो ट्रांसप्लांट है। हालांकि इस प्रक्रिया की अनुमानित लागत लगभग 40 लाख रुपये है, जो परिवार के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है। अगर ट्रांसप्लांट समय पर नहीं हुआ, तो युक्ति को जीवनभर खून चढ़ाना पड़ेगा। बार-बार खून चढ़ाने से उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि इससे शरीर में आयरन की मात्रा लगातार बढ़ेगी, जो उसके अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
मदद की दरकार
युक्ति के माता-पिता अब सरकार, समाज और एनजीओ से आर्थिक सहायता की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनकी बेटी को जीवनदान मिल सके। बोन मेरो ट्रांसप्लांट के जरिए युक्ति को सामान्य जीवन जीने का अवसर मिल सकता है, लेकिन इसके लिए आर्थिक सहयोग बेहद जरूरी है।
यह मामला दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों का एक गंभीर उदाहरण है। युक्ति को अगर समय पर इलाज नहीं मिला, तो उसकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
