हर साल मई के महीने में 13 मई से 19 मई तक mental health awareness week मनाया जाता है। इस वीक को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करना है। ऐसे में आज हम आपको बाइपोलर डिसऑर्डर के बारे में जानकारी देने वाले हैं। दरअसल बाइपोलर डिसऑर्डर एक मेंटल डिसॉर्डर है जो किसी व्यक्ति के मूड, ऊर्जा और कार्य करने की क्षमता में बदलाव की वजह बनता है। बाइपोलर डिसऑर्डर पेशेंट गंभीर भावनात्मक अनुभवों से गुज़रते हैं जो मूड एपिसोड के रूप में जाने जाते हैं।

यह अक्सर दिनों से लेकर हफ्तों तक अलग-अलग अंतराल पर हो सकते हैं। इस डिसॉर्डर से पीड़ित पेशेंट असामान्य रूप से खुश, क्रोधित या अत्यधिक उदास हो सकता है। इसके मरीज आमतौर पर न्यूट्रल मूड फेज से गुजरते हैं। अगर बाइपोलर डिसऑर्डर का सही तरीके से इलाज किया जाए तो ये सक्रिय और बढ़िया जीवन जी सकते हैं। तो आइए इस डिसॉर्डर के लक्षण और इसके होने की वजह जानते हैं।

किस वजह से ये डिसॉर्डर होता है

इस बीमारी के कारणों की बात करें तो इसमें पारिवारिक इतिहास, पर्यावरणीय कारक,खराब रिलेशनशिप, तलाक, परिवार में किसी की मृत्‍यु हो जाना, गंभीर बीमारी और पैसों की समस्याएं होना इस बीमारी के मुख्य कारण है। वहीं इस बीमारी से पीड़ित आदमी को नींद नहीं आती और ना ही भूख लगती है।

क्या है बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण

अत्यधिक उदासी, थकावट और कम ऊर्जा, किसी भी काम को करने के लिए मोटिवेशन की कमी, निराशा की भावना, किसी भी काम को करने में ख़ुशी महसूस नहीं करना, किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी का अनुभव होना, बहुत अधिक रोना-सिसकना आदि इसके लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा चिड़चिड़ापन, सोने की अधिक जरूरत महसूस करना, अनिद्रा या अधिक सोना, अधिक भूख लगने से वजन बढ़ना, आत्महत्या के विचार आना भी बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण हो सकते हैं।

By tnm

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