आज कल के लाइफस्टाइल में हर कोई मानसिक रोग से ग्रस्त है। इसका कारण भागमभाग की जिंदगी में तनाव का अधिक होना है। वहीँ बहुत से लोग छोटी छोटी बातों को लेकत स्ट्रेस पाल लेते हैं। इतना ही नहीं कायो तो बिना वजह ही टेंशन में रहते हैं। इसका सबसे जयादा असर हमारी हेल्थ पर पड़ता है। इस बारे में दिल्ली सरकार के चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के मानस रोग विभाग में आए मरीजों के विश्लेषण से पता चलता है। बता दें इस विभाग में हर साल 10 हजार से अधिक मरीज आते हैं। जो मानसिक रोग से ग्रस्त हैं।
तनाव के कारण बढ़ रहे हैं विकार
दरअसल तनाव की वजह से हर व्यक्ति के शरीर में विकार बढ़ रहे हैं। यदि तनाव को कण्ट्रोल में नहीं लाया गया तो ये कई अन्य तरह की बिमारियों को पनपने में मदद करेगा। वहीँ इस विभाग में आने वाले मरीजों की काउंसलिंग के दौरान तनाव का पता चलता है। जब तनाव का इलाज किया जाता है तो इसके साथ ही जुड़े पेट की समस्या, रक्तचाप, मनोरोग सहित दूसरे विकार भी अपने आप ही दूर हो जाते हैं।
ख़राब नींद का कारण तनाव
डॉ. पंकज कुमार कटारा ने कहा कि विभाग में इलाज के दौरान ऐसे कई मरीज ठीक हुए हैं। उनका ये भी कहना है कि तनाव के कारण मरीज की नींद खराब होती है। नींद खराब होने से पेट संबंधित दिक्कत होनी शुरू हो जाती है। साथ ही रक्तचाप, मधुमेह सहित दूसरे विकार शरीर को घेरते हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो मनोरोग हो जाता है। विभाग में ऐसे मरीजों का इलाज योग, पंचकर्मा और दवाओं की मदद से किया जाता है।
तनाव में पंचकर्मा मददगार
डॉ. पूजा सभरवाल ने कहा कि तनाव से पीड़ित मरीजों में पंचकर्मा प्रभावी है। संस्थान में मरीजों का स्नेहन, स्वेदन, शिरो धारा, वमन, विरेचन, नस्य, बस्ति सहित दूसरी सुविधाओं से इलाज किया जाता है। इनकी मदद से शरीर को आराम मिला शुरू हो जाता है। साथ ही मन भी शांत होता है। इन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मरीजों की स्थिति का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि पहले के मुकाबले मरीज काफी बेहतर स्थिति में हैं।
तनाव को रोग नहीं मानते मरीज
डॉ. जय सिंह ने कहा कि मरीज तनाव को रोग नहीं मानते। संस्थान में रोजाना डेढ़ हजार से अधिक मरीज अलग-अलग विभाग की ओपीडी में इलाज करवाने आते हैं। काउंसलिंग के दौरान इनमें तनाव का पता चलता है। समस्या ज्यादा होने पर रोजाना 50 से 60 मरीजों को मानस रोग विभाग में रेफर या सीधे भेजा जाता है। इनमें से अधिकतर मरीज तनाव से पीड़ित होते हैं। तनाव का इलाज करने के बाद दूसरी समस्याएं भी खत्म हो जाती हैं।
20 से 70 साल तक के हैं मरीज
संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक, 20 से 70 साल तक के लोग तनाव से ग्रस्त हैं। इनमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। वहीं दस साल के छोटे बच्चों में भी तनाव देखने को मिल रहा है। ऐसे बच्चों में विकार गंभीर नहीं होता, जबकि युवाओं में स्थिति गंभीर है।
इस तरह से किया जाता है इलाज
योग, स्ट्रेस मैनेजमेंट, पंचकर्मा, दवाएं
जीवन शैली में सुधार
खान-पान में बदलाव
