केरल की बात करें तो आये दिन केरल में कोई न कोई वायरल आता ही रहता है। ऐसे में अब केरल के उत्तरी जिले कोझिकोड़ में वेस्ट नाइल बुखार से कई लोग ग्रस्त हो चुकें हैं। जिला निगरानी टीम के एक अधिकारी के मुताबिक पांच बच्चे इसकी चपेट में आये थे। फ़िलहाल अब वे सभी बच्चे और अन्य लोग ठीक हैं। उन्हें घर भेजा जा चूका है।
वेस्ट नाइल बुखार से बच्चे हैं सुरक्षित
आपको बता दें कि लक्षण दिखने पर इलाज कराने वाले व्यक्तियों के नमूने नियमित प्रक्रिया के तहत पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजे गए थे। जिनकी रिपोर्ट आने के बाद पता चला है कि सभी ठीक हैं, लेकिन वेस्ट नाईल बुखार से पीड़ित थे। दरअसल ये क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छरों से फैलता है। केरल में 2011 में पहली बार इस बुखार का पता चला था और मलप्पुरम के छह साल के लड़के की 2019 में बुखार के कारण मृत्यु हो गई थी।
वेस्ट नाइल वायरस क्या है
दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक इसका पहला मामला 1937 में सामने आया था। तब युगांडा की रहने वाली एक महिला इस वायरस की चपेट में आई थी। वहीँ 1953 में उत्तरी मिस्र के नाइल डेल्टा रीजन में पक्षियों में इस वायरस की पहचान की गयी थी। तब कौओं और कबूतरों में ये वायरस के लक्षण देखने को मिले थे। 1997 से पहले तक इस वायरस को पक्षियों के लिए ज्यादा खतरनाक नहीं माना जाता था, लेकिन इसके बाद इजरायल में इस वायरस का एक खतरनाक स्ट्रेन सामने आया, जिससे कई पक्षियों की मौत हो गई थी।
इंसानों में किस तरह से फैलता है ये वायरस
ये वायरस इंसान में मच्छरों की वजह से फैलता है। ये वायरस पक्षियों में भी फैलता है। ये वायरस पक्षियों से होते हुए मच्छरों तक और मच्छरों से इंसानों में आता है। इस वायरस का मच्छर जब किसी संक्रमित पक्षी को काटता है तो ये वायरस उनमें आ जाता है और जब यही संक्रमित मच्छर इंसानों को काटते हैं तो ये इंसान को अपनी चपेट में ले लेता है। वहीँ कई बार ऑर्गन ट्रांसप्लांट, ब्लट ट्रांसफ्यूजन और ब्रेस्ट मिल्क से भी ये वायरस हो सकता है। हालांकि, अभी तक इंसान से इंसान में इस वायरस के फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
