जब हर महीने बच्चे को खून चढ़ाना किसी भी मां बाप के लिए बहुत ही मुश्किल काम होता है। ऐसे में बच्चे को भी शांति से ट्रीट करना किसी टारगेट से कम नहीं होता है। वहीँ यदि बच्चे को खून न चढ़ाया जाये तो उसकी जान को खतरा होता है। दरअसल खून चढ़ाना तरह की बीमारी है जिसमे बच्चे के शरीर में खून की कमी हो जाती है, जिसे थैलेसीमिया कहा जाता है। आपको बता दें आज यानि कि 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जा रहा है। इस बारे में और भी अधिक जानकारी जनाल्धर के सिविल हॉस्पिटल के डॉ. सुरजीत सिंह ने जानकारी दी।
जालन्धर के सिविल हॉस्पिटल में हैं इतने केस
डॉ. सुरजीत सिंह ने बताया कि उनके यहाँ 72 बच्चे थैलेसीमिया के हैं, जिन्हें हर महीने खून चढ़ाया जाता है। वहीँ हेमोफिलिया ए के 19 बच्चे और हेमोफिलिया बी के 4 बच्चे हैं। उन्होंने बतया कि यह रक्त रोग जेनेटिक भी हो सकता है। इस बीमारी की पहचान जन्म के दौरान हो पाना थोडा मुश्किल होता है। हालांकि 3 माह बाद इसकी पहचान हो पाना संभव हो जाता है। इस बीमारी में बच्चे के शरीर में खून की कमी होने लगती है। जिसके चलते बच्चे को एनीमिया होने का खतरा भी रहता है। यदि समय पर सही इलाज न मिला तो बच्चे की मृत्यु भी हो जाती है। उनके मुताबिक भारतवर्ष में 3 फीसदी व्यक्ति थैलेसीमिया से पीड़ित हैं।
रेड ब्लड सेल्स नष्ट होने लगते हैं
डॉ. सुरजीत के अनुसार थैलेसीमिया रक्त संबंधी बीमारी होने के कारण ही बच्चों में जन्म से ही पता चल जाती है। ऐसे में ब्लड नहीं बनता है। इसके चलते इस बीमारी के चपेट में आने वाले बच्चे को सबसे अधिक खून की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि थैलेसीमिया के मरीजों में लाल रक्त कण कम समय में ही नष्ट हो जाते हैं। दरअसल, सामान्यतौर पर एक व्यक्ति के शरीर में पाए जाने वाले लाल रक्त कणिकाओं की उम्र लगभग 120 दिन होती है। इसके बाद खान-पान से शरीर में फिर रक्त बनता है। वहीं, थैलेसीमिया के मरीजों में लाल रक्त कणिकाओं की उम्र घट जाती है। उनमें नया रक्त बनने का समय नहीं मिल पाता है और वह एनीमिया का शिकार होने लगते हैं। इस बीमारी का उचित समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
इसके लक्षणों को कैसे पहचानें
डॉ. सुरजीत ने बताया कि इस बीमारी का मुख्य कारण लाल रक्त कण का नष्ट होना होता है। हीमोग्लोबिन कम होने के कारण मरीज एनीमिया का शिकार हो जाता है। थैलेसीमिया से ग्रसित होने पर
ज्यादातर कमजोरी
हर समय थकावट
सर्दी-जुकाम
पेट में सूजन
स्किन का रंग पीला पड़ना
किस तरह से हो सकता है बचाव
पति-पत्नी अपने खून की जांच कराएं, क्योंकि कई बार माइनर थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति को पता ही नहीं होता है कि वह इस बीमारी से पीड़ित है। ऐसे में पति-पत्नी को खून की जांच कराने से आनुवांशिक रोग से होने वाले बच्चे को बचाया जा सकता है।
