एक तरफ जहां लोग अंगदान करके लोगों की जीवन बचाने की मुहिम को जोड़ रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ जयपुर के निजी अस्पतालों में मानव अंगों की तस्करी के काले कारनामों का मामला सामने आया है। जी हां जयपुर में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए फर्जी एनओसी जारी करने में पैसों के लेन-देन का खुलासा होने के बाद केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज की पूर्व कमेटी की संदिग्ध भूमिका की जांच लेकर सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि पिछले महीने जयपुर पुलिस ने फर्जी एनओसी जारी करने के मामले में सवाई मानसिंह अस्पताल के एक कर्मचारी के साथ निजी अस्पतालों के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। ये तीनों आरोपी फर्जी एनओसी जारी करने वाले गिरोह के मुख्य किरदार थे।
इस गिरोह में बांग्लादेशी लोग भी शामिल
पिछले महीने गुड़गांव पुलिस ने फर्जी तरीके से किडनी ट्रांसफर करने वाले गैंग का पर्दाफाश किया। इतना ही नहीं इस गैंग में बांग्लादेशी लोग भी शामिल थे। वहीं इस बीच एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जयपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए फर्जी एनओसी जारी करने वाले मामले का खुलासा किया।
लाखों रुपए लेकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट की फर्जी एनओसी जारी
एसीबी की जांच के मुताबिक निजी अस्पतालों में लाखों रुपए लेकर हर महीने फर्जी तरीके से ऑर्गन ट्रांसप्लांट की एनओसी जारी की जाती थी। हालांकि एनओसी जारी करने वाली कमेटी की पिछले दो साल एक भी बैठक नहीं हुई। इसके बावजूद प्राइवेट अस्पतालों में सैंकड़ों एनओसी जारी कर दी गई। इस जांच के दौरान एसीबी ने तीन निजी अस्पतालों के दस्तावेज जब्त किए हैं।
विदेशी लोगों को लगाई गई किडनी
एसीबी की जांच के रिपोर्ट के मुताबिक निजी अस्पतालों में कई विदेशी लोगों के किडनियां ट्रांसप्लांट की गई। हालंकि किडनी डोनेट करने वाले ब्लड रिलेशन में नहीं थे फिर भी उन्हें फर्जी एनओसी जारी कर और गैर कानूनी तरीके से ऑर्गन ट्रांसप्लांट होते रहे। इतना ही नहीं जांच में यह भी पाया गया है कि कि बांग्लादेश के कई लोगों की किडनियां अन्य देशों के लोगों को लगाई गई। इसके बदले उन्हें सिर्फ 4 से 5 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
