आज के दौर में AI सिर्फ टेक्नोलॉजी का हिस्सा नहीं बल्कि हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। साथ ही ये सेहत को परखने में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ESC) के वैज्ञानिकों ने EHRA 2025 सम्मेलन में एक नई रिसर्च पेश की, जिसमें AI का उपयोग किया गया और ECG डेटा से दिल की ‘बायोलॉजिकल उम्र’ पता करने का तरीका विकसित किया गया।
दिल की दो तरह की उम्र
अध्ययन के मुताबिक ECG रिपोर्ट की मदद से AI ये बता सकता है कि आपका दिल आपकी असली उम्र से कितना ज्यादा या कम हेल्दी है। आपको बता दें कि हर व्यक्ति की दिल की उम्र दो तरह की होती है- क्रोनोलॉजिकल (वास्तविक) उम्र और बायोलॉजिकल (जैविक) उम्र। क्रोनोलॉजिकल उम्र जन्म के सालों के अनुसार तय होती है और बायोलॉजिकल उम्र बताती है कि आपका दिल कितने अच्छे तरीके से काम कर रहा है। इसलिए अब AI की मदद से ECG रिपोर्ट से ये पता लगाया जा सकता है कि आपका दिल कहीं आपकी असली उम्र से ज्यादा तेजी से बूढ़ा हो रहा है या नहीं।
शोध
इस अध्ययन के जरिए वैज्ञानिकों ने 5 लाख लोगों के ECG डेटा का विश्लेषण किया और एक डीप लर्निंग एल्गोरिदम विकसित की। वहीं, इस AI टूल ने दिल की बायोलॉजिकल उम्र का आकलन किया और पता लगाया कि कौन लोग दिल की बीमारी और मौत के ज्यादा खतरे में हैं।
दिल और मृत्यु दर का गहरा संबंध
आपको बता दें कि शोध के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। इसका मतलब कि अगर दिल की बायोलॉजिकल उम्र, वास्तविक उम्र से 7 साल ज्यादा है तो मौत का खतरा 62% और गंभीर दिल की बीमारी (MACE) का खतरा 92% बढ़ जाता है। वहीं अगर दिल की उम्र क्रोनोलॉजिकल उम्र से 7 साल कम है तो मौत का खतरा 14% और दिल की बीमारी का खतरा 27% तक घट जाता है।
ECG देगा सटीक नतीजे
शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों का इजेक्शन फ्रैक्शन (EF) कम था यानी जिनका दिल खून पंप करने में कमजोर था, उनकी ECG रिपोर्ट में QRS अवधि ज्यादा पाई गई। ये बताता है कि उनके दिल के इलेक्ट्रिकल सिग्नल धीमी गति से संचारित हो रहे हैं। वहीं, इन मरीजों में QT इंटरवल भी ज्यादा देखा गया और पता चला कि उनके दिल का संकुचन और रिलैक्सेशन सामान्य से ज्यादा समय ले रहा है।
भविष्य
अगर ऐसे ही ठीक तरीके से काम चलता रहा तो भविष्य में AI द्वारा ECG डेटा का विश्लेषण करने की ये तकनीक दिल की बीमारी के खतरा का पता लगाने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। एसोसिएट प्रोफेसर बैक का कहना है कि फिलहाल इस तकनीक के लिए बड़े पैमाने पर और ज्यादा अध्ययन की आवश्यकता है, जिससे इसके नतीजों को और अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाया जा सके।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
