हमारे देश में लोग दूध वाली चाय को बहुत पसंद करते हैं। चाहे गर्मी हो या ठंड, लोग इसे नहीं छोड़ते।उनका मानना है कि ये माइंड को रिफ्रेश तो करता ही है, साथ ही आलस भी नहीं आता। लेकिन दूध वाली चाय का जितना फायदा है, उतना ही नुकसान भी।
चाय के नुकसान
दूध वाली चाय से एसिडिटी
बहुत से लोग है जिन्हें दूध वाली चाय पीने से एसिडिटी होती है। पर कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ दूध वाली चाय पीकर बोर हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी इन्हीं लोगों में से एक हैं तो हम आपके लिए कुछ चाय के ऑप्शन लेकर आए हैं, जिसे आप ट्राई कर सकते हैं।
चाय के प्रकार?
भारत में वैसे कई तरह की चाय मिलती हैं और इनके नाम भी अलग-अलग हैं। लेकिन आपको यहां कुछ प्रकार की चाय बताएंगे, जैसे कि ब्लैक टी, ग्रीन टी, हर्बल टी,कश्मीरी कहवा, मसाला चाय, आइस टी,
ओलॉन्ग टी, बटर टी/तिब्बती चाय
ब्लैक और ग्रीन टी

आपको पता ही होगा कि ब्लैक टी वाली चाय बिना दूध की होती है। इसे आप नींबू और शहद के साथ पी सकते हैं। ये पीने में भी हल्की होती है और ताजगी आती है। ग्रीन टी को भी एक अच्छा ऑप्शन है। ये एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है और इसको पीने से बॉडी डिटॉक्स होती है। ग्रीन टी के सेवन से इम्यूनिटी बूस्ट होती है और वजन भी नियंत्रित रहता है।
हर्बल टी और कश्मीरी कहवा

आपको बता दें कि हर्बल टी को पुदीना, तुलसी, अदरक और लेमनग्रास जैसी चीजों से मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके सेवन से स्ट्रेस कम होता है और पाचन भी बेहतर होता है। वहीं, कश्मीरी कहवा की बात करें तो ये कश्मीर की एक फेमस चाय है। इसे केसर, इलायची, दालचीनी सहित अन्य कई चीजों से तैयार किया जाता है और इसमें शहद मिलाकर पिया जाता है।
ओलॉन्ग टी और बटर टी/तिब्बती चाय

ओलॉन्ग टी अक्सर ग्रीन टी और ब्लैक टी के बीच की चाय होती है। इसका स्वाद ब्लैक टी जितना स्ट्रॉन्ग नहीं होता और न ही ग्रीन टी जितना हल्का। इसके सेवन से डाइजेशन बेहतर होता है और वजन भी नियंत्रित रहता है। वहीं, बटर टी को तिब्बती चाय भी कहते हैं। इसे बनाने के लिए मक्खन और नमक मिलाया जाता है और इसे ठंडे इलाकों में पसंद किया जाता है। आइस टी और मसाला चाय का भी सेवन कर सकते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
