प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने स्वास्थ्य मंत्रालय से ऑक्सीजन सिलेंडरों पर औद्योगिक और चिकित्सीय ऑक्सीजन को अलग करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब विधायक अजीत माधवराव गोपचड़े ने मरीजों के हित में इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने इस आवश्यकता को प्राथमिकता देने की अपील की है, जिससे चिकित्सीय ऑक्सीजन की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
ऑक्सीजन की गुणवत्ता पर चिंता
गोपचड़े ने इस बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोविड-19 महामारी के दौरान, जिन लोगों को बाहरी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी, उनमें से एक महत्वपूर्ण संख्या को फंगल संक्रमण हुआ और उनमें से कई लोग अपनी दृष्टि खो बैठे। गोपचड़े ने बताया कि यह स्थिति तब पैदा हुई, जब औद्योगिक ऑक्सीजन और चिकित्सीय ऑक्सीजन में भेद की कमी थी और इस पर कोई सख्त नियंत्रण नहीं था।
उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चिकित्सीय ऑक्सीजन की गुणवत्ता पर दिशानिर्देश जारी किए हैं, और इसे लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि राज्य और केंद्र सरकारों को चिकित्सीय ऑक्सीजन की गुणवत्ता की गारंटी देने के लिए अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
PMO की कार्रवाई
प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय से निर्देश दिया कि वे उचित कदम उठाएं। मंत्रालय को यह निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित अधिकारियों को राज्य सरकारों को सलाह देने के लिए कहें, ताकि चिकित्सीय ऑक्सीजन की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके और ऑक्सीजन उत्पादन सुविधाओं की अनिवार्य निरीक्षण किया जा सके।
भारत में ऑक्सीजन की आपूर्ति
भारत में चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति का प्रबंधन स्वास्थ्य मंत्रालय और उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा किया जाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना के लिए दिशानिर्देश तैयार करता है, जबकि DPIIT औद्योगिक और चिकित्सीय ऑक्सीजन, दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति का प्रबंधन करता है।
औद्योगिक और चिकित्सीय ऑक्सीजन का अंतर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, औद्योगिक और चिकित्सीय ऑक्सीजन की शुद्धता और गुणवत्ता में अंतर होता है। WHO के दस्तावेज़ में कहा गया है, इसलिए औद्योगिक और चिकित्सीय ऑक्सीजन का उपयोग एक दूसरे के स्थान पर नहीं किया जा सकता है।
इस दिशा में कदम उठाने से न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि ऑक्सीजन के उपयोग में होने वाली गड़बड़ियों को भी रोका जा सकेगा।
