चाइनीज मांझा, जिसे खासकर पतंगबाजी के दौरान इस्तेमाल किया जाता है, देशभर में एक गंभीर समस्या बन चुका है। मकर संक्रांति के मौके पर यह मांझा न केवल पक्षियों का शिकार करता है, बल्कि इंसानों की जान के लिए भी खतरे की घंटी बजाता है। हाल ही में कई राज्यों में चीनी मांझे की चपेट में आने से कई लोग घायल हुए हैं और कुछ की मौत भी हो गई है।
खतरनाक घटनाएं: कई राज्यों में बढ़ी दुर्घटनाएं
मकर संक्रांति के दौरान यूपी के वाराणसी में सिपाही सहित नौ लोग चाइनीज मांझे की चपेट में आ गए। इनमें से एक सिपाही की हालत गंभीर बताई जा रही है। लखनऊ में भी एक युवक का गला कट गया, जिससे उसे 15 टांके लगाए गए। गुजरात में चीनी मांझे से 4 साल की बच्ची समेत 4 लोगों की जान चली गई। राजस्थान और नासिक में भी कई लोग इसकी चपेट में आकर घायल हुए हैं।
क्या है चाइनीज मांझा
चाइनीज मांझा सामान्य पतंगबाजी के मांझे से अलग होता है। इसे नायलॉन और मेटालिक पाउडर से बनाया जाता है, और इसमें एल्युमिनियम ऑक्साइड और लेड जैसे खतरनाक पदार्थ मिलाए जाते हैं। इसके अलावा इस मांझे में कांच या लोहे के चूर से धार भी लगाई जाती है, जो इसे घातक बना देती है। यह प्लास्टिक जैसा दिखता है और बहुत मजबूत होता है। जब इसे खींचा जाता है, तो यह टूटता नहीं है, बल्कि खिंचाव में और बड़ा हो जाता है। इस वजह से पतंग उड़ाते वक्त यह मांझा किसी के गले को आसानी से काट सकता है।
बैन और कानूनी कार्रवाई
भारत सरकार ने चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन फिर भी इसका अवैध रूप से बिक्री और उपयोग जारी है। यह मांझा पर्यावरण और जानवरों के लिए भी खतरनाक है। इसे बेचने और खरीदने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत 5 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसे इस्तेमाल और बिक्री पर प्रतिबंध है।
